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वाणिज्य मंत्रालय ने कालीनों पर ड्यूटी ड्राबैक दरें घटाईं
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भदोही। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कालीन उद्यमियों मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉ-बैक दरों में फेरबदल कर दिया है। ऊनी और मैनमेड फाइबर के बने कालीन उत्पादों पर जहां आंशिक बढ़ोतरी की गई है, वहीं सिल्क से बनी कालीनों की दरें और कैप घटा दिए हैं। भदोही परिक्षेत्र में अधिकतर ऊनी और मैनमैड फाइबर के कालीनों का उत्पादन होने से परिक्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
भदोही परिक्षेत्र में मुख्यत: नॉटेड कालीन, दरी-हैंडलूम और टफ्टेड कालीनों का उत्पादन हो रहा है। बीते कुछ वर्षों में मानव निर्मित धागों का उपयोग भी कालीनों में बढ़ा है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि ऊनी हैंडनाटेड कालीनों पर 3.7 से बढ़ाकर 3.8 प्रतिशत और अधिकतम कैप 394 रुपये से बढ़ाकर 423 रुपये प्रति मीटर कर दी गई है। मैनमेड फाइबर 1.7 प्रतिशत प्रति मीटर से 2.4 प्रतिशत अधिकतम 235 रुपये प्रति मीटर कर दिया है।
इसी प्रकार से ऊनी गैर हैंडनाटेड कालीनों पर 3.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.8 प्रतिशत और कैप 87 रुपये से बढ़ाकर 101 रुपये प्रति मीटर एवं मैनमेड फाइबर वाले कालीनों को 4 प्रतिशत से 4.7 करते हुए कैप 97 रुपये से बढ़ाकर 123 कर दिया गया है। ऊनी टफ्टेड कालीनों पर दरें 4.6 की जगह 4.7 प्रतिशत होंगी और कैप 114 रुपये के बजाए 129 रुपये मिलेगा। इन्हीं कालीनों मे मैनमेड फाइबर की दर 1.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.9 प्रतिशत करते हुए कैप 48 रुपये प्रति मीटर कर दिया गया है।
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गैर टफ्टेड ऊनी कालीनों पर अब 3.7 प्रतिशत के बजाए 3.8 प्रतिशत मिलेगा और अधिकतम कैप 122 रुपये से बढ़ाकर 129 रुपये कर दिया गया है। कुल मिलाकर सिल्क कालीनों पर ड्रॉबैक दरें उद्योग के अनुकूल नहीं हैं। हालांकि भदोही, मिर्जापुर वाराणसी परिक्षेत्र में सिल्क कालीनों का उत्पादन कम होता है, जिससे यहां के लोग कम प्रभावित हुए हैं। सिल्क के नाटेड और गैरनाटेड कालीनों पर दरें जो अब तक 14.9 प्रतिशत थी, उसे घटाकर 10.2 करते हुए नाटेड पर कैप 7205 रुपये मीटर से कम कर 4987 और गैर नाटेड पर कैप 2410 प्रति मीटर से 1803 रुपये प्रति मीटर कर दिया गया है।
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भदोही परिक्षेत्र में मुख्यत: नॉटेड कालीन, दरी-हैंडलूम और टफ्टेड कालीनों का उत्पादन हो रहा है। बीते कुछ वर्षों में मानव निर्मित धागों का उपयोग भी कालीनों में बढ़ा है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि ऊनी हैंडनाटेड कालीनों पर 3.7 से बढ़ाकर 3.8 प्रतिशत और अधिकतम कैप 394 रुपये से बढ़ाकर 423 रुपये प्रति मीटर कर दी गई है। मैनमेड फाइबर 1.7 प्रतिशत प्रति मीटर से 2.4 प्रतिशत अधिकतम 235 रुपये प्रति मीटर कर दिया है।
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इसी प्रकार से ऊनी गैर हैंडनाटेड कालीनों पर 3.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.8 प्रतिशत और कैप 87 रुपये से बढ़ाकर 101 रुपये प्रति मीटर एवं मैनमेड फाइबर वाले कालीनों को 4 प्रतिशत से 4.7 करते हुए कैप 97 रुपये से बढ़ाकर 123 कर दिया गया है। ऊनी टफ्टेड कालीनों पर दरें 4.6 की जगह 4.7 प्रतिशत होंगी और कैप 114 रुपये के बजाए 129 रुपये मिलेगा। इन्हीं कालीनों मे मैनमेड फाइबर की दर 1.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.9 प्रतिशत करते हुए कैप 48 रुपये प्रति मीटर कर दिया गया है।
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गैर टफ्टेड ऊनी कालीनों पर अब 3.7 प्रतिशत के बजाए 3.8 प्रतिशत मिलेगा और अधिकतम कैप 122 रुपये से बढ़ाकर 129 रुपये कर दिया गया है। कुल मिलाकर सिल्क कालीनों पर ड्रॉबैक दरें उद्योग के अनुकूल नहीं हैं। हालांकि भदोही, मिर्जापुर वाराणसी परिक्षेत्र में सिल्क कालीनों का उत्पादन कम होता है, जिससे यहां के लोग कम प्रभावित हुए हैं। सिल्क के नाटेड और गैरनाटेड कालीनों पर दरें जो अब तक 14.9 प्रतिशत थी, उसे घटाकर 10.2 करते हुए नाटेड पर कैप 7205 रुपये मीटर से कम कर 4987 और गैर नाटेड पर कैप 2410 प्रति मीटर से 1803 रुपये प्रति मीटर कर दिया गया है।