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जनसंख्या में वृद्धि, सुविधाओं का अभाव

Fri, 10 Jul 2020 04:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2020 04:09 PM IST
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Increase in population, lack of facilities
ज्ञानपुर। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी मुहिम धरातल पर फेल हो गई। नौ साल में ही जिले की आबादी 3.92 लाख बढ़ गई, जिसकी रफ्तार 22 फीसदी रही, हालांकि उम्मीद के हिसाब से सुविधाएं मयस्सर नहीं हो सकी। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से लेकर अन्य कल्याणकारी योजनाएं आम नागरिकों तक नहीं पहुंच सकी।
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देश के आर्थिक, सामरिक विकास में जनसंख्या सबसे बड़ा रोड़ा बनता है। इसलिए तीन से चार दशक पूर्व से परिवार नियोजन को लेकर नसबंदी, जागरूकता अभियान तो चले लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा। 2011 में जिले की जनसंख्या जहां 15 लाख 78 हजार 213 रही वहीं वर्तमान में प्रस्तावित आबादी 19 लाख 70 हजार 972 तक पहुंच गई है। 2021 में जनगणना होने तक यह संख्या बढ़ जाएगी। इससे नौ साल में जनसंख्या तीन लाख 92 हजार बढ़ी। सुविधाओं के लिहाज से काम काफी हुए, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने का इंतजार कर रहे हैं। जीवन स्तर में इजाफा न होने के कारण अधिकतर लोग महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं।
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सड़कों पर नजर डाली जाए तो एक दशक में ज्ञानपुर-गोपीगंज, भदोही- दुर्गागंज, कलिंजरा- सुरियावां मार्ग, सुभाषनगर से रोही मार्ग, जंगीगंज-धनतुलसी मार्ग, ज्ञानपुर- दुर्गागंज मार्ग और मिर्जापुर- भदोही मार्ग चौड़ी हुई, जबकि कई चौड़ी होनी बाकी है। स्वास्थ्य में भदोही के एमबीएस और सुरियावां के सीएचसी में अलग से महिला अस्पताल बने जबकि कई भ्रष्टाचार के कारण अभी तक पूर्ण नहीं हो सके। शिक्षा में 250 से अधिक सरकारी और सौ से अधिक निजी प्राइमरी से लेकर इंटर तक के स्कूल खुले, लेकिन शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन का स्तर बेहतर नहीं हो सका। जिले की 19.70 लाख की आबादी में पात्र गृहस्थी और अंत्योदय के साढ़े तीन लाख कार्डधारक हैं जबकि बड़ी संख्या में अब भी पात्र वंचित है। जिला अर्थसंख्या अधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि 2021 में जनगणना होनी है। 19.70 लाख प्रस्तावित आबादी है। कई परियोजनाएं पूर्ण न होने से उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा।
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जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास, शौचालय, मनरेगा जैसी प्रमुख योजनाओं पर औसतन हर साल 200 से 250 करोड़ खर्च हुए। नौ साल में यह आंकड़ा 1800 करोड़ के करीब पहुंच गया, लेकिन जरूरी सुविधाओं से आज भी बड़ी संख्या में लोग वंचित है।

भ्रष्टाचार के कारण परियोजनाएं लंबित
ज्ञानपुर। स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, शौचालय, सड़क और मनरेगा जैसी योजनाओं में भ्रष्टाचार का दीमक भी लगा। यही कारण है कि 18 करोड़ की लागत से 2009 से निर्माणाधीन सौ शैय्या का अस्पताल अब तक पूर्ण नहीं हो सका। अभोली में पांच करोड़ से बन रही सीएचसी भी अधूरी ही रह गई। करीब दो लाख नए शौचालय के निर्माण में 200 करोड़ के करीब खर्च हुए लेकिन 50 फीसदी शौचालय किसी लायक नहीं है।
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