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हिंदी एक भाषा नहीं, हमारी संस्कृति व पहचान की आत्मा : डॉ. रमेश
केएनयू के हिंदी विभाग में हिंदी दिवस पर गोष्ठी में बोलते वक्ता। स्रोत विभाग
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ज्ञानपुर। जिले मेंे शिक्षण संस्थानों, संगठनों की ओर से सोमवार को हिंदी दिवस मनाया गया। गोष्ठी, निबंध आदि के माध्यम से हिंदी के इतिहास पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि हिंदी एक भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान की आत्मा है। इसके बिना जीवन अधूरा है। काशी नरेश विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदी दिवस मनाया गया। विभाग प्रभारी डॉ. रमेश ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ सूत्र है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपनी मातृभाषा के प्रति स्वाभिमान और गर्व का भाव जागृत करने का आह्वान किया।
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डॉ. शिरीष एवं उमेश दत्त तिवारी ने हिंदी के साहित्यिक वैभव और आधुनिक संचार माध्यमों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता पर प्रकाश डाला। कहा कि आज के डिजिटल और इंटरनेट युग में हिंदी भाषा अत्यंत तीव्र गति से वैश्विक संवाद का सशक्त माध्यम बन रही है। प्रो. अजय सिंह यादव ने कहा कि जब तक वैज्ञानिक अनुसंधान और उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं को यथोचित स्थान नहीं मिलेगा, तब तक ज्ञान का लोकतंत्रीकरण संभव नहीं है। प्राचार्य प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसकी निज भाषा की उन्नति से ही संभव है। इसी तरह कंपोजिट विद्यालय ज्ञानपुर में अखिलेश कुमार यादव ने हिंदी की संविधान में मान्यता और महत्व जैसे विषय को समझाया। हिंदी हमारे दिल की भाषा है। डॉ. विमल कुमार मिश्रा ने कहानी लेखन और निबंध लेखन के बारे में बताया। इस मौके पर शिवम श्रीवास्तव, रतनलाल, हीरोमणि यादव आदि रहे। सुरियावां के प्राथमिक विद्यालय बनकट में हिंदी दिवस पर बच्चों को हिंदी भाषा के महत्व, उसकी विशेषताओं एवं जीवन में उपयोगिता के बारे में बताया गया। प्रधानाध्यापक डॉ. ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा कि हिंदी केवल संचार का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन से जुड़ी भाषा है। मौके पर सहायक अध्यापक रविकांत दुबे, संतोष कुमार आदि रहे।
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