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हरी खाद से दूर होती है कार्बनिक तत्वों की कमी

Thu, 21 Apr 2022 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2022 12:36 AM IST
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Green manure removes the lack of organic elements
बढ़ती जनसंख्या के बीच गुणवत्ता युक्त अनाज का उत्पादन करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि कृषि जोत दर बढ़ने की बजाय प्रतिदिन कम हो रही है। किसान समसामयिक फसलों की कटाई होने के बाद हरी खाद की बुआई कर मिट्टी में घट रहे कार्बनिक पदार्थों की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। अनाज के उत्पादन से लेकर मिट्टी की शक्ति को बरकरार रखा सकता है।
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यह जानकारी बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के प्रसार विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि हरी खाद वह प्रक्रिया है, जिसमें कुछ फसलों के हरे पौधे को खेतों में पलट कर मिला दिया जाता है। जिससे न सिर्फ भौतिक संरचना में सुधार होता है, बल्कि उर्वरता-उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। हरी खाद लगभग 40 से 135 किग्रा नत्रजन प्रति हेक्टेयर भूमि को उपलब्ध कराते हैं। किसान हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा, लोबिया, उर्दू, मूंग, सेजी, नील आदि की बुआई उचित नमी में अप्रैल से मई तक बुआई सकते हैं। बुआई के दौरान 10 से 12 किलोग्राम प्रति बीघा बीज डालनी चाहिए। इसके बाद 45 से 60 दिन के अंदर गहरी जुताई करके मिट्टी में मिलाएं। पलटते समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। मिट्टी में मिलाते समय हरी खाद की फसल में फूल नहीं न आने पाए। जलवायु की परिस्थितियों में हरी खाद की बुआई करें।
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