सीतामढ़ी। करीब 10 दिनों तक जिले में हाहाकार मचाने के बाद गंगा के जलस्तर में तीसरे दिन भी घटाव जारी रहा है। दो मीटर पानी कम होने से कई बस्तियों में से पानी निकल चुका है। अभी भी गंगा का जलस्तर 79 मीटर के पार है। कोनिया क्षेत्र में कटान अब भी जारी है। जगह-जगह ठहरे पानी के दुर्गंध से भी लोगों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही। पानी उतरने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका की ओर से दवाओं का छिड़काव न होने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी हुई है।
पिछले दिनों पहाड़ों पर हुई बारिश संग बांधों से नदियों में पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा। करीब 81.940 मीटर पहुंचने के बाद से जलस्तर बृहस्पतिवार की सुबह से धीरे धीरे घटने लगा है। शुरूआत में एक सेमी प्रति घंटा जलस्तर में घटाव आया, लेकिन अब छह सेमी प्रति घंटे की दर से पानी नीचे खिसक रहा है। इससे मवैयाथान सिंह, इटहरा, कलिकमवैया समेत 20 से 25 गांवों में भरा पानी धीरे-धीरे हट रहा है। जल स्तर में कमी निरंतर जारी है। छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैयाथानसिंह गांव के तटवर्ती जमीनों का कटान अभी भी तेजी से हो रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने धन खर्च कर जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर तो लगवा दिया जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हो गए लेकिन यह व्यवस्था कटान की परीक्षा में फेल साबित हुआ। किसानों का कहना है कि भुर्रा गांव के आगे धनतुलसी घाट के पास गंगा की धारा में डायवर्जन करने से ही गंगा के कटान को रोका जा सकता है। उल्लेखनीय है कि गंगा कटान से चार गांवों की हजारों बीघे उपजाऊ भूमि गंगा की धारा में समा चुकी है। इसी तरह बाढ़ का जल स्तर घटने से बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम होने लगी है। बता दें कि गंगा बाढ़ के पानी में क्षेत्र के किसानों की फसलें जलमग्न हो कर नष्ट हो गई है। सर्वे में पता चल सकेगा कि कितना नुकसान हुआ, लेकिन किसानों का कहना है कि दो हजार बीघे अरहर, बाजरा संग अन्य फसलें नष्ट हुई। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी गेज कार्यालय के अनुसार जल स्तर का घटाव छह सेमी प्रति घंटे हो रहा