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UP: कैबिनेट मंत्री नंदी पर हमले में भी मुख्य आरोपी है पूर्व विधायक, 1982 में हंडिया में दर्ज हुआ था पहला केस
Sun, 05 Nov 2023 09:29 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 05 Nov 2023 09:29 AM IST
सार
पूर्व विधायक विजय मिश्रा के खिलाफ 1982 में हंडिया में पहला केस दर्ज हुआ था। अब तक मुकदमों की संख्या 83 पहुंच गई है। तीन में फैसला हो गया है। पूर्व विधायक कैबिनेट मंत्री नंदी पर हमले में भी मुख्य आरोपी है।
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vijay mishra mla
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सूबे के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर 2010 में हुए हमले में भी पूर्व विधायक विजय मिश्रा मुख्य आरोपी है। यह मामला अदालत के विचाराधीन है। विजय मिश्रा के खिलाफ 1982 में पहला मुकदमा प्रयागराज के हंडिया थाने में दर्ज हुआ था। अब मुकदमो की संख्या 83 हो गई है। 21 मुकदमे अदालत के विचाराधीन हैं।
हंडिया थाना क्षेत्र के खपटिहा निवासी विजय मिश्रा जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र स्थित कौलापुर गांव में रहता था। रिश्तेदार की संपति हड़पने के मुकदमे में 2020 तक यहीं पर रहा। हालांकि गिरफ्तारी के बाद से ही कुनबा प्रयागराज में रहने लगा। उसके खिलाफ वर्ष 1982 में हत्या के प्रयास का पहला मुकदमा हंडिया थाने में लिखा गया था।
फिर एक के बाद एक मुकदमे होते चले गए। बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नंद गोपाल नंदी के ऊपर हुए हमले में भी विजय मिश्रा का नाम सामने आया था। इस मामले में विजय मुख्य आरोपी है।
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पहले नैनी, चित्रकूट और बाद में आगरा जेल
रिश्तेदार की संपति हड़पने के मुकदमे में 14 अगस्त 2020 को पुलिस ने मध्य प्रदेश से पूर्व विधायक विजय मिश्रा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे नैनी जेल में रखा गया। जहां उसका सिक्का चला तो हटाकर चित्रकूट जेल में भेजा गया। वहां भी रूतबा कम नहीं हुआ। अब आगरा जेल भेजा गया है।
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हंडिया थाना क्षेत्र के खपटिहा निवासी विजय मिश्रा जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र स्थित कौलापुर गांव में रहता था। रिश्तेदार की संपति हड़पने के मुकदमे में 2020 तक यहीं पर रहा। हालांकि गिरफ्तारी के बाद से ही कुनबा प्रयागराज में रहने लगा। उसके खिलाफ वर्ष 1982 में हत्या के प्रयास का पहला मुकदमा हंडिया थाने में लिखा गया था।
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फिर एक के बाद एक मुकदमे होते चले गए। बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नंद गोपाल नंदी के ऊपर हुए हमले में भी विजय मिश्रा का नाम सामने आया था। इस मामले में विजय मुख्य आरोपी है।
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पहले नैनी, चित्रकूट और बाद में आगरा जेल
रिश्तेदार की संपति हड़पने के मुकदमे में 14 अगस्त 2020 को पुलिस ने मध्य प्रदेश से पूर्व विधायक विजय मिश्रा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे नैनी जेल में रखा गया। जहां उसका सिक्का चला तो हटाकर चित्रकूट जेल में भेजा गया। वहां भी रूतबा कम नहीं हुआ। अब आगरा जेल भेजा गया है।
गैंगस्टर, गुंडा एक्ट भी लगा
पुलिस रिकॉर्ड में विजय मिश्रा के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, शस्त्र अधिनियम, गैंगस्टर, गुंडा, अपहरण, खनिज अधिनियम जालसाजी समेत कुल 83 मुकदमे हैं। प्रयागराज के जार्जटाउन, हंडिया, उतरांव, सरायममरेज, फूलपुर, कोतवाली, सिविल लाइंस, वाराणसी के भेलूपुर, भदोही के गोपीगंज, औराई, कोईरौना, ज्ञानपुर, मिर्जापुर के कोतवाली देहात, विंध्याचल और मेरठ व कोलकाता के शिवपुर हावड़ा में मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। कई मुकदमों में विजय मिश्रा दोषमुक्त हो चुका है तो कुछ में फाइनल रिपोर्ट लग गई। कई मुकदमों की विवेचना चल रही है। दुष्कर्म संग आर्म्स एक्ट और चुनावी सभा में फायरिंग के मुकदमे में सजा हो चुकी है।
पुलिस रिकॉर्ड में विजय मिश्रा के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, शस्त्र अधिनियम, गैंगस्टर, गुंडा, अपहरण, खनिज अधिनियम जालसाजी समेत कुल 83 मुकदमे हैं। प्रयागराज के जार्जटाउन, हंडिया, उतरांव, सरायममरेज, फूलपुर, कोतवाली, सिविल लाइंस, वाराणसी के भेलूपुर, भदोही के गोपीगंज, औराई, कोईरौना, ज्ञानपुर, मिर्जापुर के कोतवाली देहात, विंध्याचल और मेरठ व कोलकाता के शिवपुर हावड़ा में मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। कई मुकदमों में विजय मिश्रा दोषमुक्त हो चुका है तो कुछ में फाइनल रिपोर्ट लग गई। कई मुकदमों की विवेचना चल रही है। दुष्कर्म संग आर्म्स एक्ट और चुनावी सभा में फायरिंग के मुकदमे में सजा हो चुकी है।
पूर्व विधायक पर 83 मुकदमे, दो में मिल चुकी है सजा
सामूहिक दुष्कर्म में दोषी करार दिए जाने से पूर्व विधायक विजय मिश्र की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब तक दो मुकदमों में उन्हें सजा मिल चुकी है। इसमें आर्म्स एक्ट में ढाई साल, जबकि सभा में फायरिंग के मामले में प्रयागराज कोर्ट से पांच साल की सजा हुई है। पूर्व विधायक पर जनपद ही नहीं, देश-प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 83 मुकदमें दर्ज हैं। इसमें 21 का विचारण चल रहा है, जबकि सात मुकदमे शासन से वापस हो गए।
सामूहिक दुष्कर्म में दोषी करार दिए जाने से पूर्व विधायक विजय मिश्र की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब तक दो मुकदमों में उन्हें सजा मिल चुकी है। इसमें आर्म्स एक्ट में ढाई साल, जबकि सभा में फायरिंग के मामले में प्रयागराज कोर्ट से पांच साल की सजा हुई है। पूर्व विधायक पर जनपद ही नहीं, देश-प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 83 मुकदमें दर्ज हैं। इसमें 21 का विचारण चल रहा है, जबकि सात मुकदमे शासन से वापस हो गए।
रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के मुकदमे में आगरा जेल में निरूद्ध पूर्व विधायक विजय मिश्र के खिलाफ लूट, हत्या, दुष्कर्म, जालसाजी, धमकी समेत कुल 83 मुकदमे दर्ज हैं। अक्तूबर 2022 में एमपीएमएलए कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के एक मुकदमे में ढाई साल की सजा सुनाई थी। प्रयागराज एमपीएमएलए कोर्ट ने मार्च 2023 में पूर्व विधायक और उनके गनर संजय मौर्य को चुनावी सभा में फायरिंग करने के मामले में दोषी पाने पर पांच साल की सजा सुनाई थी।
बसपा सरकार में उनके खिलाफ साल 2009 में पुलिस ने आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज किया था। उसके बाद समाजवादी पार्टी की सरकार आने के बाद मुकदमे की सुनवाई लंबित हो गई। हालांकि 2020 में जेल जाने के बाद उनके नए और पुराने मामले में सुनवाई तेज हुई। अपर पुलिस अधीक्षक राजेश भारती ने बताया कि पूर्व विधायक पर कुल 83 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें भदोही के 15, प्रयागराज के तीन, मिर्जापुर के एक, मेरठ के एक, पश्चिम बंगाल के एक सहित कुल 21 मुकदमों का विचारण चल रहा है। सात मुकदमे शासन ने वापस ले लिए हैं।
दोषी विजय के पास कोई फटक नहीं पाया, सुरक्षा घेरा तगड़ा
पूर्व विधायक विजय मिश्रा की सजा को लेकर शनिवार को पुलिस अलर्ट मोड में रही। सरपतहां स्थित न्यायालय के मुख्य द्वार से लेकर अन्य मार्ग पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहे। परिसर में जाने से सबकी जांच की गई, फिर प्रवेश दिया गया। इससे वादकारियों को दिक्कत भी हुई है।
पूर्व विधायक विजय मिश्रा की सजा को लेकर शनिवार को पुलिस अलर्ट मोड में रही। सरपतहां स्थित न्यायालय के मुख्य द्वार से लेकर अन्य मार्ग पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहे। परिसर में जाने से सबकी जांच की गई, फिर प्रवेश दिया गया। इससे वादकारियों को दिक्कत भी हुई है।
मिर्जापुर में एक मुकदमे में पेशी के दौरान सरकार के खिलाफ बयानबाजी और शोरगुल मचाने के बाद से ही पूर्व विधायक की पेशी के दौरान सुरक्षा बढ़ा दी जाती है। करीब छह महीने से पेशी के दौरान उसके पास न तो कोई करीबी और न ही मीडियाकर्मी जा सका है। आमतौर पर सुरक्षा कर्मी अदालत परिसर में रहते हैं, लेकिन बाहर का सुरक्षा घेरा भी मजबूत बनाया गया।
ज्ञानपुर कोतवाली के साथ ही करीब तीन थानों की पुलिस, थाना प्रभारी मौजूद रहे। वज्र वाहन पुलिस के सुरक्षा घेरे में रहा। मुख्य गेट पर करीब 10 की संख्या में पुलिस के जवान मेडल डिटेक्टर से लोगों की जांच की।
साढ़े चार घंटे तक अदालत परिसर में रहा पूर्व विधायक
पूर्व विधायक शनिवार को करीब साढ़े चार घंटे तक अदालत परिसर में रहा। उसे सुबह साढ़े 10 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया, जहां दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच बहस चली। दोपहर तीन बजे अदालत ने फैसला सुनाया।
पूर्व विधायक शनिवार को करीब साढ़े चार घंटे तक अदालत परिसर में रहा। उसे सुबह साढ़े 10 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया, जहां दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच बहस चली। दोपहर तीन बजे अदालत ने फैसला सुनाया।