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Bhadohi News: 18 साल बाद भी चार सीएचसी के नहीं खुले दरवाजे, हैंडओवर की अंतिम डेडलाइन गुजरे सात माह बीते
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पहाड़ी ब्लाक क्षेत्र के शिवगढ़ में बना सीएचसी का भवन। स्रोत- संवाद
जिले में 18 साल पहले पहले पांच स्थानों पर 30 बेड के सीएचसी का निर्माण शुरू हुआ था। अब एक भी सीएचसी का संचालन नहीं हो सका है। पांच में सिर्फ एक सीएचसी ही हैंडओवर हुआ है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी, एसआईटी जांच के चलते अस्पताल का निर्माण कार्य छह वर्ष तक ठप रहा। चार में कहीं पर कार्य पूर्ण होने पर टेक्निकल मुआयना बाकी है तो कहीं पर दूसरे कार्य बाकी है। हैंडओवर करने की अंतिम डेडलाइन दिसंबर 2025 खत्म हुए भी सात महीने बीत चुका है।
जिले के पहाड़ी, छानबे, सीखड़, कोन और हलिया ब्लॉक क्षेत्र में 2008 में सीएचसी का निर्माण कराने के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्य सौंपा गया था। अस्पताल के निर्माण की रफ्तार इतनी सुस्त है कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान जन्मा बच्चा भी युवावस्था में पहुंच गया पर अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। जब निर्माण शुरू हुआ था तो बजट सवा तीन करोड़ रुपये था। अब सवा सात करोड़ रुपये पहुंच गया है। फिर भी सीएचसी का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसके निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता की शिकायत हुई थी। इसके बाद मामले में एसआईटी जांच का आदेश हुआ। 2017 में एसआईटी जांच शुरू हुई। कार्यदायी संस्था के जेई व अन्य पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बाद 2024 तक निर्माण कार्य ठप रहा। जांच के बाद एसआईटी ने कार्यदायी संस्था को आदेश दिया कि वे उसी बजट पर अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा करें। इसके बाद डेढ़ वर्ष पहले कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य शुरू किया। दिसंबर 2025 तक निर्माण कार्य पूरा हो जाना था, पर अभी भी सीखड़ को छोड़ पहाड़ी, छानबे, हलिया और कोन ब्लॉक के अस्पताल का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। हलिया ब्लॉक की गलरा ग्राम पंचायत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में कुछ कार्य बाकी है। चील्ह क्षेत्र में बने सीएचसी में ढलान सही न होने से पानी भर जा रहा है। इसे सही करने का निर्देश दिया गया है।
शिवगढ़ सीएचसी को हैंडओवर का इंतजार, बाकी जगह कुछ काम बाकी
पड़री। पहाड़ी ब्लॉक क्षेत्र स्थित शिवगढ़ में 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लागत की दो गुना खर्च करने के बाद किसी तरह 2026 में बनकर तैयार हुआ लेकिन विभाग को हैंड ओवर न होने से मरीजों को समस्या हो रही है। विशेषकर महिला मरीजों को बनारस व मिर्जापुर जाना पड़ रहा है। अस्पताल जल्द शुरू हो तो दो लाख की आबादी को मिर्जापुर या वाराणसी न जाना पड़े।
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वर्जन
पांच सीएचसी का निर्माण एसआईटी जांच के चलते रुका था। डेढ़ वर्ष पहले एसआईटी ने जांच कर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। इसमें सीखड़ ब्लॉक का अस्पताल चार माह पहले शुरू हो गया है। चील्ह में बने का निरीक्षण किया गया वहां पर ढाल सही न होने से पानी भर जा रहा था। उसे सही करने को कहा गया है। बाकी तीन स्थानों के एमओआईसी को निर्देश दिया गया है कि वे निर्माण में जो कमी है। उसे मानक के अनुसार जल्द-से-जल्द पूरा कराकर टेक्निकल मुआयना कराकर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरा करें। 10 दिनों में अस्पताल शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. केके मिश्रा, सीएमओ
देरी के ये हैं कारण
निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता
एसआईटी जांच की लंबी प्रक्रिया
कार्यदायी संस्था की उदासीनता
टेक्निकल मुआयना में देरी
बजट की कमी
सीएचसी बनने से बढ़ेंगी ये सुविधाएं
मिर्जापुर। सीएचसी में पीएचसी की तुलना में अधिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होती हैं। इससे मरीजों को छोटी-बड़ी बीमारियों के उपचार के लिए जिला अस्पताल या बड़े शहरों के अस्पतालों की दौड़ कम करनी पड़ेगी। सीएमओ डाॅ. केके मिश्रा ने बताया कि सीएचसी में आमतौर पर अधिक चिकित्सक, स्टाफ और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रसव, आपातकालीन उपचार, छोटे ऑपरेशन और गंभीर मरीजों की शुरुआती देखभाल की सुविधा भी बेहतर हो सकती है। मरीजों की जांच के लिए लैब और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है। रात के समय भी चिकित्सा सुविधा मिलने से ग्रामीणों को विशेष लाभ होगा। क्षेत्र में सीएचसी बनने से आसपास के गांवों के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल सकेगा।
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जिले के पहाड़ी, छानबे, सीखड़, कोन और हलिया ब्लॉक क्षेत्र में 2008 में सीएचसी का निर्माण कराने के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्य सौंपा गया था। अस्पताल के निर्माण की रफ्तार इतनी सुस्त है कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान जन्मा बच्चा भी युवावस्था में पहुंच गया पर अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। जब निर्माण शुरू हुआ था तो बजट सवा तीन करोड़ रुपये था। अब सवा सात करोड़ रुपये पहुंच गया है। फिर भी सीएचसी का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसके निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता की शिकायत हुई थी। इसके बाद मामले में एसआईटी जांच का आदेश हुआ। 2017 में एसआईटी जांच शुरू हुई। कार्यदायी संस्था के जेई व अन्य पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बाद 2024 तक निर्माण कार्य ठप रहा। जांच के बाद एसआईटी ने कार्यदायी संस्था को आदेश दिया कि वे उसी बजट पर अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा करें। इसके बाद डेढ़ वर्ष पहले कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य शुरू किया। दिसंबर 2025 तक निर्माण कार्य पूरा हो जाना था, पर अभी भी सीखड़ को छोड़ पहाड़ी, छानबे, हलिया और कोन ब्लॉक के अस्पताल का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। हलिया ब्लॉक की गलरा ग्राम पंचायत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में कुछ कार्य बाकी है। चील्ह क्षेत्र में बने सीएचसी में ढलान सही न होने से पानी भर जा रहा है। इसे सही करने का निर्देश दिया गया है।
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शिवगढ़ सीएचसी को हैंडओवर का इंतजार, बाकी जगह कुछ काम बाकी
पड़री। पहाड़ी ब्लॉक क्षेत्र स्थित शिवगढ़ में 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लागत की दो गुना खर्च करने के बाद किसी तरह 2026 में बनकर तैयार हुआ लेकिन विभाग को हैंड ओवर न होने से मरीजों को समस्या हो रही है। विशेषकर महिला मरीजों को बनारस व मिर्जापुर जाना पड़ रहा है। अस्पताल जल्द शुरू हो तो दो लाख की आबादी को मिर्जापुर या वाराणसी न जाना पड़े।
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पांच सीएचसी का निर्माण एसआईटी जांच के चलते रुका था। डेढ़ वर्ष पहले एसआईटी ने जांच कर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। इसमें सीखड़ ब्लॉक का अस्पताल चार माह पहले शुरू हो गया है। चील्ह में बने का निरीक्षण किया गया वहां पर ढाल सही न होने से पानी भर जा रहा था। उसे सही करने को कहा गया है। बाकी तीन स्थानों के एमओआईसी को निर्देश दिया गया है कि वे निर्माण में जो कमी है। उसे मानक के अनुसार जल्द-से-जल्द पूरा कराकर टेक्निकल मुआयना कराकर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरा करें। 10 दिनों में अस्पताल शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. केके मिश्रा, सीएमओ
देरी के ये हैं कारण
निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता
एसआईटी जांच की लंबी प्रक्रिया
कार्यदायी संस्था की उदासीनता
टेक्निकल मुआयना में देरी
बजट की कमी
सीएचसी बनने से बढ़ेंगी ये सुविधाएं
मिर्जापुर। सीएचसी में पीएचसी की तुलना में अधिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होती हैं। इससे मरीजों को छोटी-बड़ी बीमारियों के उपचार के लिए जिला अस्पताल या बड़े शहरों के अस्पतालों की दौड़ कम करनी पड़ेगी। सीएमओ डाॅ. केके मिश्रा ने बताया कि सीएचसी में आमतौर पर अधिक चिकित्सक, स्टाफ और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रसव, आपातकालीन उपचार, छोटे ऑपरेशन और गंभीर मरीजों की शुरुआती देखभाल की सुविधा भी बेहतर हो सकती है। मरीजों की जांच के लिए लैब और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है। रात के समय भी चिकित्सा सुविधा मिलने से ग्रामीणों को विशेष लाभ होगा। क्षेत्र में सीएचसी बनने से आसपास के गांवों के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल सकेगा।