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जल शक्ति मिशन पर ग्रहण, 58 एजेंसियों ने बंद किया कार्य
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ज्ञानपुर। शासन की महत्वाकांक्षी योजना जल शक्ति मिशन पर ग्रहण लग गया है। 58 एजेंसियों ने काम बंद कर दिया है। मुख्य कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों का स्थानांतरण होने से जून में चालू होने वाली 14 इकाइयों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजर की देखरेख में कार्यरत 58 निर्माण एजेंसियों ने भुगतान न होने के डर से कार्य रोक दिया है। इससे लगभग ढाई लाख परिवारों को पेयजल न मिलने की चिंता सताने लगी है।
जल शक्ति मिशन योजना के तहत जिले की 546 ग्राम पंचायतों में 367 का चयन काम के लिए किया गया था। प्रथम चरण में 82 ग्राम पंचायतों में मिशन को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए हरी झंडी मिलने पर वेलस्पन के साथ लगभग दो सौ निर्माण एजेंसियाें ने पाइप लाइन, बोरिंग, पंप हाउस, बाउंड्रीवाल, ओवरहेड का काम शुरू कर दिया था। प्रोजेक्ट मैनेजर का स्थानांतरण अंबेडकरनगर होने पर पाइप लाइन के 40, बोरिंग के तीन, बाउंड्रीवास के 15 एजेंसियों ने इस कार्य इसलिए बंद कर दिया है कि पहले का भुगतान नहीं हुआ तो मजदूरों को मजदूरी और स्वयं की पूंजी से हाथ धोना पड़ेेगा।
67 इकाइयों का 50 फीसदी कार्य होने पर 12 हजार घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए टोटी लग चुकी है। 11 ओवरहेड में तीन का निर्माण शुरू हुआ है, आठ का नहीं। यही स्थिति पंप हाउस के लिए नामित एजेंसी के साथ है, जिसने सात पंप हाउस का निर्माण कर 12 को छोड़ दिया है। 14 इकाइयों को जून में प्राथमिकता के तौर पर बिना ओवरहेड के ही भूमिगत पाइप से पेयजल की सप्लाई चालू कराने के लिए 15 से 25 हार्स पावर के सबमर्सिबल पंप बफर गोदाम भदोही में डंप हैं। हैवी बोरिंग में इन सबमर्सिबल पंप को डालने के लिए सात एजेंसियां चयनित थीं, जो अभी तक जिले में नहीं पहुंच सकी है। इससे यही साबित हो रहा है कि योजना ने गति नहीं पकड़ी तो पाइपलाइन युक्त पेयजल का इंतजार अगले वर्ष तक करना पड़ेगा। जून तक 14 परियोजनाएं पूर्ण होने पर करीब ढाई लाख परिवारों को शुद्ध पानी पहुंचता, लेकिन अब संचालन पर ही संकट हो गया है।
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जल शक्ति मिशन योजना के तहत जिले की 546 ग्राम पंचायतों में 367 का चयन काम के लिए किया गया था। प्रथम चरण में 82 ग्राम पंचायतों में मिशन को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए हरी झंडी मिलने पर वेलस्पन के साथ लगभग दो सौ निर्माण एजेंसियाें ने पाइप लाइन, बोरिंग, पंप हाउस, बाउंड्रीवाल, ओवरहेड का काम शुरू कर दिया था। प्रोजेक्ट मैनेजर का स्थानांतरण अंबेडकरनगर होने पर पाइप लाइन के 40, बोरिंग के तीन, बाउंड्रीवास के 15 एजेंसियों ने इस कार्य इसलिए बंद कर दिया है कि पहले का भुगतान नहीं हुआ तो मजदूरों को मजदूरी और स्वयं की पूंजी से हाथ धोना पड़ेेगा।
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67 इकाइयों का 50 फीसदी कार्य होने पर 12 हजार घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए टोटी लग चुकी है। 11 ओवरहेड में तीन का निर्माण शुरू हुआ है, आठ का नहीं। यही स्थिति पंप हाउस के लिए नामित एजेंसी के साथ है, जिसने सात पंप हाउस का निर्माण कर 12 को छोड़ दिया है। 14 इकाइयों को जून में प्राथमिकता के तौर पर बिना ओवरहेड के ही भूमिगत पाइप से पेयजल की सप्लाई चालू कराने के लिए 15 से 25 हार्स पावर के सबमर्सिबल पंप बफर गोदाम भदोही में डंप हैं। हैवी बोरिंग में इन सबमर्सिबल पंप को डालने के लिए सात एजेंसियां चयनित थीं, जो अभी तक जिले में नहीं पहुंच सकी है। इससे यही साबित हो रहा है कि योजना ने गति नहीं पकड़ी तो पाइपलाइन युक्त पेयजल का इंतजार अगले वर्ष तक करना पड़ेगा। जून तक 14 परियोजनाएं पूर्ण होने पर करीब ढाई लाख परिवारों को शुद्ध पानी पहुंचता, लेकिन अब संचालन पर ही संकट हो गया है।
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