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Bhadohi News: वनांचल में सूखे जलाशय, प्यास बुझाने की मारामारी
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भीषण गर्मी से जिले के जलाशय सूख गए हैं। पानी संकट हर जगह है लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी वनांचल क्षेत्र में है। नौगढ़ के जंगलों में पानी की बेहद कमी है। टैंकर से पानी भेजा जा रहा है लेकिन वह नाकाफी है। यह पानी मनुष्यों के लिए ही पर्याप्त नहीं है। ऐसे में पशुओं को पालना मुश्किल हो गया है। लोग पशुओं को दूसरी जगह भेज रहे हैं।नौगढ़ विकासखंड में आम दिनों में पहाड़ों के चुआड़, जलस्त्रोतों से पानी मिल जाता है पर गर्मी में सब सूख जाते हैं। इस साल स्थिति बहुत खराब है। तालाब, प्राकृतिक नाले, चुआड़, नदी, नाले सूख गए हैं। यहां तक कि चकिया का चंद्रप्रभा बांध भी सूख गया है। मूसाखंड, मुबारकपुर, मझराती ताला, तेंदूई बंधी, वनभीषमपुर, छितमपुर,ढोढनपुर, बेलावर और शिकारगंज के बांध भोका, प्रभुनारायणपुर ढकहीं, दाउदपुर, गनेशपुर, फिरोजपुर, पंडि गुलाल बंधियों में एक बूंद भी पानी नहीं है। हैंडपंपों से भी गंदा पानी निकल रहा है।
जमसोती प्राथमिक विद्यालय जैसे कुछ हैंडपंपों में पानी ठीक है तो वहां भीड़ लग रही है नौगढ़ विकासखंड की 43 ग्राम पंचायतों में रोजाना 65 टैंकर पानी लेकर जा रहे हैं। हर ग्राम पंचायत में एक टैंकर की व्यवस्था है। दूर के गांव शाहपुर, लौवारी कला, केसार, धनकुवारी कला, मझगांवां, देउरी कला, गढ़वां में डबल टैंकर भेजा जाता है। एक टैंकर में पांच हजार लीटर पानी होता है। एक गांव की आबादी सबसे कम 500 है। ऐसे में एक टैंकर पानी 24 घंटे के लिए अपर्याप्त है। पशुओं के लिए पानी नहीं बचता है। लोग पानी खुद पीएं, परिवार को पिलाएं या फिर पशुओं को। समस्या को देखते हुए मार्च में ही नौगढ़ के ज्यादातार लोग अपने मवेशियों को चकिया और सोनभद्र के मैदानी इलाके में रहने वाले अपने परिचितों को भेज चुके हैं।
एडीओ एमआई आगाज खान कहते हैं कि प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने से भूजल स्तर पर प्रभाव पड़ा है। सतही जल लगातार नीचे खिसक रहा है। खंड विकास अधिकारी रविंद्र प्रताप यादव ने कहा कि पेयजल सिस्टम में दिक्कत आने पर ब्लॉक में मौजूद वार रूम में सूचना दी जा सकती है। जिसके समाधान का तत्काल प्रयास होगा।
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इनसेट-- -- -- -- --
पानी के लिए भटक रहे वन्यजीव
जंगल के जलस्रोतों के सूखने से सबसे ज्यादा समस्या वन्यजीवों को है। चकिया, नौगढ़ और मझगाई रेंज के जंगलों में लंगूर, नीलगाय, हिरन, भालू, बारहसिंघा, तेंदुआ, शाही, चीतल, खरगोश, बंदर आदि को पीने के पानी नहीं मिल पा रहा है। वन्य जीवों को पानी की तलाश में मीलों भटकना पड़ता है। मई के शुरुआत में पानी न मिलने से एक बारहसिंघे की मौत हो गई थी। संवाद
हर हैंडपंप पर 150 लोगों का दारोमदार
चंदौली। जिले में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए लिए दो दर्जन से अधिक पेयजल योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। जिले में 16 लाख की आबादी के लिए 30 हजार हैंडपंप लगाए गए हैं। हर 150 की आबादी पर एक हैंडपंप है लेकिन तमाम हैंडपंपों गर्मी की शुरुआत में ही जवाब दे चुके हैं। हैंडपंपों की मरम्मत व उन्हें रिबोर कराने का जिम्मा ग्राम पंचायत का है लेकिन प्रधान इसमें रुचि ही नहीं ले रहे हैं।
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नौगढ़ भैसोड़ा में पेयजल परियोजना का मंजूरी मिल गई है। क्षेत्र के 12 हजार से ज्यादा घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाएगा। यहां वाटर प्लांट लगने के बाद वनांचल की पानी की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी।-अमन यादव, एक्सईएन, जलनिगम (ग्रामीण)
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जमसोती प्राथमिक विद्यालय जैसे कुछ हैंडपंपों में पानी ठीक है तो वहां भीड़ लग रही है नौगढ़ विकासखंड की 43 ग्राम पंचायतों में रोजाना 65 टैंकर पानी लेकर जा रहे हैं। हर ग्राम पंचायत में एक टैंकर की व्यवस्था है। दूर के गांव शाहपुर, लौवारी कला, केसार, धनकुवारी कला, मझगांवां, देउरी कला, गढ़वां में डबल टैंकर भेजा जाता है। एक टैंकर में पांच हजार लीटर पानी होता है। एक गांव की आबादी सबसे कम 500 है। ऐसे में एक टैंकर पानी 24 घंटे के लिए अपर्याप्त है। पशुओं के लिए पानी नहीं बचता है। लोग पानी खुद पीएं, परिवार को पिलाएं या फिर पशुओं को। समस्या को देखते हुए मार्च में ही नौगढ़ के ज्यादातार लोग अपने मवेशियों को चकिया और सोनभद्र के मैदानी इलाके में रहने वाले अपने परिचितों को भेज चुके हैं।
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एडीओ एमआई आगाज खान कहते हैं कि प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने से भूजल स्तर पर प्रभाव पड़ा है। सतही जल लगातार नीचे खिसक रहा है। खंड विकास अधिकारी रविंद्र प्रताप यादव ने कहा कि पेयजल सिस्टम में दिक्कत आने पर ब्लॉक में मौजूद वार रूम में सूचना दी जा सकती है। जिसके समाधान का तत्काल प्रयास होगा।
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पानी के लिए भटक रहे वन्यजीव
जंगल के जलस्रोतों के सूखने से सबसे ज्यादा समस्या वन्यजीवों को है। चकिया, नौगढ़ और मझगाई रेंज के जंगलों में लंगूर, नीलगाय, हिरन, भालू, बारहसिंघा, तेंदुआ, शाही, चीतल, खरगोश, बंदर आदि को पीने के पानी नहीं मिल पा रहा है। वन्य जीवों को पानी की तलाश में मीलों भटकना पड़ता है। मई के शुरुआत में पानी न मिलने से एक बारहसिंघे की मौत हो गई थी। संवाद
हर हैंडपंप पर 150 लोगों का दारोमदार
चंदौली। जिले में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए लिए दो दर्जन से अधिक पेयजल योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। जिले में 16 लाख की आबादी के लिए 30 हजार हैंडपंप लगाए गए हैं। हर 150 की आबादी पर एक हैंडपंप है लेकिन तमाम हैंडपंपों गर्मी की शुरुआत में ही जवाब दे चुके हैं। हैंडपंपों की मरम्मत व उन्हें रिबोर कराने का जिम्मा ग्राम पंचायत का है लेकिन प्रधान इसमें रुचि ही नहीं ले रहे हैं।
नौगढ़ भैसोड़ा में पेयजल परियोजना का मंजूरी मिल गई है। क्षेत्र के 12 हजार से ज्यादा घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाएगा। यहां वाटर प्लांट लगने के बाद वनांचल की पानी की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी।-अमन यादव, एक्सईएन, जलनिगम (ग्रामीण)