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जालसाजी में प्रधानपति दोषी करार
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:23 AM IST
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ज्ञानपुर। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने शेरपुर गोपलहां के पूर्व प्रधानपति लाल बहादुर पाल को फर्जी तरीके से अपात्रों के लिए आवास आवंटन कराकर अवैध धन वसूली के मामले में दोषी करार दिया है। 2015 में इंदिरा आवास योजना में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिली थी। तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने जांच कराकर मुकदमा दर्ज किया था। प्रकरण में ग्राम पंचायत अधिकारी की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अभियोजन के अनुसार शेरपुर गोपलहां निवासी राजन शुक्ला ने शिकायत किया था कि उसके गांव में इंदिरा आवास अपात्रों को फर्जी बीपीएल सूची तैयार कराकर दिलाया गया। प्रधान पति लाल बहादुर पाल की ओर से लाभार्थियों से अवैध पैसे की वसूली की गई। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने मुख्य विकास अधिकारी को ग्राम प्रधान रजपत्ती देवी और उसके पति लाल बहादुर के अलावा, ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया था। जिसमें जांच कराने पर कुल 45 लाभार्थी फर्जी मिले। उनको दूसरे नाम से बीपीएल सूची में हेरफेर कर आवास आवंटित किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधानपति लाल बहादुर पाल, ग्राम पंचायत अधिकारी शेषमणि पांडेय के खिलाफ 419, 420, 467, 471, 409 के तहत दुर्गागंज थाने में 2015 में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। दोनों पक्षों के बहस और तर्कों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण पांडेय की अदालत ने प्रधानपति लाल बहादुर पाल को उपरोक्त प्रकरण में दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से बहस और पैरवी पंकज तिवारी और सहायक अभियोजन अधिकारी घनश्याम सिंह ने किया। मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तीन अक्तूबर की तिथि मुकर्रर की गई है। इस प्रकरण में प्रधानपति लाल बहादुर पाल पूर्व से ही जेल में है।
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अभियोजन के अनुसार शेरपुर गोपलहां निवासी राजन शुक्ला ने शिकायत किया था कि उसके गांव में इंदिरा आवास अपात्रों को फर्जी बीपीएल सूची तैयार कराकर दिलाया गया। प्रधान पति लाल बहादुर पाल की ओर से लाभार्थियों से अवैध पैसे की वसूली की गई। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने मुख्य विकास अधिकारी को ग्राम प्रधान रजपत्ती देवी और उसके पति लाल बहादुर के अलावा, ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया था। जिसमें जांच कराने पर कुल 45 लाभार्थी फर्जी मिले। उनको दूसरे नाम से बीपीएल सूची में हेरफेर कर आवास आवंटित किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधानपति लाल बहादुर पाल, ग्राम पंचायत अधिकारी शेषमणि पांडेय के खिलाफ 419, 420, 467, 471, 409 के तहत दुर्गागंज थाने में 2015 में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। दोनों पक्षों के बहस और तर्कों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण पांडेय की अदालत ने प्रधानपति लाल बहादुर पाल को उपरोक्त प्रकरण में दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से बहस और पैरवी पंकज तिवारी और सहायक अभियोजन अधिकारी घनश्याम सिंह ने किया। मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तीन अक्तूबर की तिथि मुकर्रर की गई है। इस प्रकरण में प्रधानपति लाल बहादुर पाल पूर्व से ही जेल में है।
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