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पीएम के सपनों को ग्रहण लगा रहे भ्रष्टाचारी

Sun, 03 Sep 2017 12:44 AM IST
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:44 AM IST
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पीएम के सपनों को ग्रहण लगा रहे भ्रष्टाचारी
ज्ञानपुर (भदोही)।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन योजना में भी भ्रष्टाचार का घुन लग गया है। ग्राम पंचायतों में बन रहे शौचालयों में घपलेबाजी उजागर होने लगी है। जिले में अब तक दो गांवों के प्रधान घपलेबाजी में फंस चुके हैं, जबकि 10 गांवों की जांच शुरू हो चुकी है। जिले को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए दिसंबर तक एक लाख 34 हजार शौचालय का निर्माण होना है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह पूरा होता प्रतीत नहीं हो रहा है। खास बात यह है कि 2012 के पूर्व बने बड़ी संख्या में शौचालय सिर्फ कागज पर ही तैयार हुए।
देश को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन अभियान चला रही है। इस योजना के तहत घर-घर शौचालय बनाने के साथ ही साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की कवायद चल रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में भदोही जिले में एक लाख 34 हजार शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गंगा से सटे 46 गांवों को प्राथमिकता के आधार पर खुले में शौच से मुक्त करने के लिए शौचालय निर्माण चल रहा है। शौचालय बनने के साथ उसमें धांधली भी शुरू हो गई है। पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर तक सुविधा शुल्क के खेल में लाभार्थी फंसकर परेशान हो जा रहे हैं। जांच में अब तक दो गांवों में शौचालय में भ्रष्टाचार उजागर हो चुका है, जिसमें गोपालापुर- कलिंजरा और परगासपुर शामिल हैं। इसी तरह, 10 से अधिक गांवों की जांच चल रही है। इसमें सेमरा, रेवड़ा, डंगहर, बहुता चकडाही समेत अन्य गांव शामिल हैं। विभागीय जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, धांधली परत-दर-परत खुल रही है।
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जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन सरोज पांडेय ने कहा कि शौचालय निर्माण में जहां-जहां शिकायत मिल रही है, वहां जांच कराई जा रही है। महत्वाकांक्षी योजना में धांधली किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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दिसंबर तक जिला ओडीएफ होना मुश्किल
ज्ञानपुर। शासन के निर्देश पर प्रशासन भले ही दिसंबर 2017 तक जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने की बात कह रहा हो, लेकिन संसाधन के अभाव में यह पूर्ण होता नहीं दिख रहा है। बालू, गिट्टी समेत अन्य संसाधन न मिलने से बड़ी संख्या में शौचालय आधे-अधूरे पड़े हैं।


शौचालय निर्माण के लिए अनुदान
स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालय के लिए लाभार्थी को सरकार की ओर से 12 हजार रुपये का अनुदान मिलता है। इसमें लाभार्थी कुछ अंश लगाकर शौचालय बनवाता है।


यह है गड़बड़ी
शौचालय निर्माण के दौरान ज्यादातर गांवों में प्रधान ही ठेकेदारी करते हैं। मानक के विपरीत दोयम दर्जे के ईंट और अन्य मैटीरियल लगाकर काम चलाया जाता है। छह से आठ फीट के बजाए तीन-चार फीट के गड्ढे ही खोदे जाते हैं। कई बार कम धनराशि की वजह भी शौचालय निर्माण में आड़े आती है।
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