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गंगारामपुर में 17 अपात्रों को मिला प्रधानमंत्री आवास
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:51 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार जड़ तक पहुंच चुकी है। योजना को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए सभी कदम बेमतलब साबित हो रहे हैं। ग्राम प्रधान और सेक्रेटरियों की मनमानी के आगे सभी नियम-कानून ताख पर चले गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना की जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अपात्रों की गठरी खुलती जा रही है। अभोली के गंगारामपुर गांव में 17 अपात्रों को आवास देने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों के विरोध करने पर दुबारा जांच की जाएगी।
छत विहीन परिवारों को छत मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना को चला रही है। इस योजना के तहत तीन किश्तों में लाभार्थी को करीब एक लाख 20 हजार रुपये दिया जाता है। चयन के बाद पहले किश्त में लाभार्थी को 40 हजार रुपये भेजा जाता है। जिले के बहुता चकडाही, डंगहर, गड़ौरा जैसे गांवों में अब तक 40 से अधिक अपात्रों को आवास आवंटित होने का मामला सामने आ चुका है। इन लाभार्थियों से रिकवरी की कवायद चल रही है। डंगहर के नौ अपात्रों ने साढ़े तीन लाख की रिकवरी जमा करा दी। पिछले दिनों गंगारामपुर गांव निवासी जुलुम सिंह पुत्र जगजीवन राम ने आईजीआरएस से शिकायत कर अपात्रों को आवास देने का आरोप लगाया था। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने बीडीओ को जांच कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। बीडीओ ने एडीओ एसटी से जांच कराई तो करीब 17 अपात्र मिले। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने दुबारा जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों की मांग पर सीडीओ ने बीडीओ खुद जांच करने के लिए कहा। वहीं दूसरी ओर डंगहर गांव में अपात्र लाभार्थियों ने आवास की पहली किश्त का तीन लाख 60 हजार वापस कर लिया।
गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में अपात्र आएंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। योजना का आवंटन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ शासन को पत्र लिखा जाएगा। - हरिशंकर सिंह, सीडीओ
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार जड़ तक पहुंच चुकी है। योजना को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए सभी कदम बेमतलब साबित हो रहे हैं। ग्राम प्रधान और सेक्रेटरियों की मनमानी के आगे सभी नियम-कानून ताख पर चले गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना की जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अपात्रों की गठरी खुलती जा रही है। अभोली के गंगारामपुर गांव में 17 अपात्रों को आवास देने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों के विरोध करने पर दुबारा जांच की जाएगी।
छत विहीन परिवारों को छत मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना को चला रही है। इस योजना के तहत तीन किश्तों में लाभार्थी को करीब एक लाख 20 हजार रुपये दिया जाता है। चयन के बाद पहले किश्त में लाभार्थी को 40 हजार रुपये भेजा जाता है। जिले के बहुता चकडाही, डंगहर, गड़ौरा जैसे गांवों में अब तक 40 से अधिक अपात्रों को आवास आवंटित होने का मामला सामने आ चुका है। इन लाभार्थियों से रिकवरी की कवायद चल रही है। डंगहर के नौ अपात्रों ने साढ़े तीन लाख की रिकवरी जमा करा दी। पिछले दिनों गंगारामपुर गांव निवासी जुलुम सिंह पुत्र जगजीवन राम ने आईजीआरएस से शिकायत कर अपात्रों को आवास देने का आरोप लगाया था। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने बीडीओ को जांच कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। बीडीओ ने एडीओ एसटी से जांच कराई तो करीब 17 अपात्र मिले। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने दुबारा जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों की मांग पर सीडीओ ने बीडीओ खुद जांच करने के लिए कहा। वहीं दूसरी ओर डंगहर गांव में अपात्र लाभार्थियों ने आवास की पहली किश्त का तीन लाख 60 हजार वापस कर लिया।
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गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में अपात्र आएंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। योजना का आवंटन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ शासन को पत्र लिखा जाएगा। - हरिशंकर सिंह, सीडीओ
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