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पौने आठ लाख के गबन में फंसे सेमरा प्रधान
Updated Fri, 13 Apr 2018 11:52 PM IST
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अभोली विकास खंड के सेमरा हरिकरनपुर गांव के ग्राम प्रधान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब वह पौने आठ लाख के गबन में फंस गए हैं। नामित अधिकारी ने उसकी जांच रिपोर्ट शुक्रवार को डीएम को भेज दी है। माना जा रहा है कि प्रधान और सेक्रेटरी पर कार्रवाई हो सकती है। इसके पूर्व भी प्रधान पर धमकी, जालसाजी, तालाब पर पट्टा देने के मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
वर्ष 2017 में सेमरा हरिकरनपुर गांव के ग्रामीणों ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि गांव में विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनियमितता की जा रही है। इसके बाद मामले की जांच के लिए डीएम ने बीएसए को जांच अधिकारी नामित किया। लेकिन वह बीच में ही जांच छोड़ दिए। उसके बाद डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने जिला दिव्यांग जनसशक्तीकरण अधिकारी, अवर अभियंता लोक निर्माण विभाग को जांच के लिए नामित किया। फरवरी और मार्च 2018 में दोनों अधिकारियों ने विकास कार्यों की स्थलीय और तकनीकी रूप से जांच की। जांच में मनरेगा के कार्यों के अलावा शौचालय, खंड़जा आदि कार्यों में अनियमितता पाई गई।
जांच के अनुसार ग्राम प्रधान ने अपने बेटे की फर्म को सात बार में ढाई लाख से अधिक धनराशि अनुचित तरीके से दे दी थी। शासन से रोक के बाद भी विश्वास कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म को सोलर लाइट के लिए एक लाख 93 हजार का भुगतान किया पाया गया। भुगतान के दौरान उच्चाधिकारियों का हस्ताक्षर चेक आदि पर भी नहीं पाया गया। इसी तरह शौचालय निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आई। पूर्व में बने शौचालयों को नया दिखाकर भुगतान कर लिया गया। अफसरों की जांच में स्कूल में शौचालय निर्माण में 40 हजार, सोलर लाइट में वर्ष 2016 -17 में एक लाख 93 हजार और 2017-18 में एक लाख 93 हजार, खड़ंजा निर्माण में 18 हजार, बेटे की फर्म को दो लाख 52 हजार, शाकपिट निर्माण में 48 हजार और मनरेगा मजदूरी में 26 हजार मिलाकर कुल 7.73 लाख का गबन सामने आया। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। डीएम स्तर पर प्रधान और सेक्रेटरी पर कार्रवाई तय की जाएगी।
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वर्ष 2017 में सेमरा हरिकरनपुर गांव के ग्रामीणों ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि गांव में विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनियमितता की जा रही है। इसके बाद मामले की जांच के लिए डीएम ने बीएसए को जांच अधिकारी नामित किया। लेकिन वह बीच में ही जांच छोड़ दिए। उसके बाद डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने जिला दिव्यांग जनसशक्तीकरण अधिकारी, अवर अभियंता लोक निर्माण विभाग को जांच के लिए नामित किया। फरवरी और मार्च 2018 में दोनों अधिकारियों ने विकास कार्यों की स्थलीय और तकनीकी रूप से जांच की। जांच में मनरेगा के कार्यों के अलावा शौचालय, खंड़जा आदि कार्यों में अनियमितता पाई गई।
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जांच के अनुसार ग्राम प्रधान ने अपने बेटे की फर्म को सात बार में ढाई लाख से अधिक धनराशि अनुचित तरीके से दे दी थी। शासन से रोक के बाद भी विश्वास कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म को सोलर लाइट के लिए एक लाख 93 हजार का भुगतान किया पाया गया। भुगतान के दौरान उच्चाधिकारियों का हस्ताक्षर चेक आदि पर भी नहीं पाया गया। इसी तरह शौचालय निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आई। पूर्व में बने शौचालयों को नया दिखाकर भुगतान कर लिया गया। अफसरों की जांच में स्कूल में शौचालय निर्माण में 40 हजार, सोलर लाइट में वर्ष 2016 -17 में एक लाख 93 हजार और 2017-18 में एक लाख 93 हजार, खड़ंजा निर्माण में 18 हजार, बेटे की फर्म को दो लाख 52 हजार, शाकपिट निर्माण में 48 हजार और मनरेगा मजदूरी में 26 हजार मिलाकर कुल 7.73 लाख का गबन सामने आया। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। डीएम स्तर पर प्रधान और सेक्रेटरी पर कार्रवाई तय की जाएगी।
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