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ओडीएफ का हाल: शौचालय में कहीं छत नहीं तो कहीं टूटे हैं दरवाजे

Tue, 04 Jan 2022 09:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jan 2022 09:27 PM IST
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Condition of ODF: If there is no roof in the toilet, then the doors are broken somewhere
चौरी के जमुआ गांव में आधा अधूरा शौचालय। - फोटो : BHADOHI
घर-घर शौचालय बनवाकर स्वच्छता मिशन को आगे बढ़ाने और जिले केे ओडीएफ यानी खुले में शौचमुक्त घोषित करने के लिए करीब पांच साल पहले अभियान चला। उसका नतीजा रहा कि जैसे-तैसे कालीन नगरी को भी ओडीएफ घोषित कर दिया गया, लेकिन अब स्थिति बदहाल है। करीब साढ़े तीन साल पहले जिस जिले को ओडीएफ घोषित किया गया अब वहां लोटा पार्टी सक्रिय है। लेकिन अब कई शौचालयों में कहीं छत टपक रही है तो कही टूटे दरवाजे हैं। वहीं जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हैं और गांवों की निगरानी समितियां दूसरे कामों लगी हैं।
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करीब 15.87 लाख की आबादी वाले जिले में दो लाख 49 हजार से कुछ ज्यादा व्यक्तिगत शौचालय बनवाए गए थे। बेस लाइन सर्वे के आधार पर बने शौचालयों का निर्माण पूर्ण दिखाकर स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारियों ने जिले को ओडीएफ घोषित करा दिया। अब उन पूर्ण हुए शौचालयों की स्थिति काफी खराब है। आलम यह है कि ओडीएफ का हाल जानने के लिए न कभी स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारी जाते हैं और न ही कर्मचारी। जबकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत रखे गए कर्मचारी भारी भरकम मानदेय भी लेते हैं। इस संबंध में स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक सरोज पांडेय ने कहा कि निगरानी समितियां टीकाकरण व कोविड की जागरुकता में लगी हैं।
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इन इलाकों की बदहाल है स्थिति
इस समय ओडीएफ की स्थिति और शौचालयों के उपयोग की स्थिति की पड़ताल की गई तो चकभुईधर ग्राम प्रधान की स्थिति काफी खराब है। यहां दो दर्जन से अधिक घरों वाले वनवासी बस्ती के साथ ही तमाम घरों में शौचालय नहीं बना है। यहां के अजय कुमार ने बताया कि बस्ती में कोई शौचालय नहीं है। जमुआ में बने शौचालय की स्थिति भी खराब है। वहां कई उपयोग लायक नहीं हैं।
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अभोली में भी स्थिति खराब
अभोली ब्लाक के प्रयागपुर गांव में कन्हैयालाल गौतम का शौचालय है, लेकिन उसमें दरवाजा नहीं। अनुज गौतम का शौचालय बनाया गया था लेकिन दरवाजा नहीं लगा था, सीट भी नहीं लगा है। पवन गौतम का शौचालय प्लास्टर नहीं है। सामने कूड़े का ढेर भी लगा है। मंगला प्रसाद गौतम का शौचालय बना हुआ है, लेकिन छत नहीं है। श्यामलाल का शौचालय निर्माण शुरू करके केवल छोड़ दिया गया है। इसी तरह विजय कुमार, रंजीत कुमार के शौचालय की सिर्फ नींव पड़ी है। इस संबंध में ग्राम प्रधान सुरेश कुमार मौर्य ने बताया कि यह शौचालय जो बने हैं मेरे कार्यकाल के नहीं हैं। सचिव आयुष कुमार बिंद ने भी पूर्व सचिव पर मामला टाल दिया।
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