ज्ञानपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय कागजों में पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर इनमें कई की स्थिति दयनीय है। कहीं पानी की कमी, कहीं टंकी अपूर्ण तो कहीं शेड न लगने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पण के बाद भी तस्वीर नहीं बदल सकी। करीब 10 सामुदायिक शौचालय का निर्माण जमीन के अभाव में शुरू नहीं हो सके है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर जिले की सभी 546 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं। उनके संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। इसके लिए उन्हें हर महीने पारिश्रमिक दी जाती है। शौचालयों की साफ-सफाई के लिए भी अलग से बजट दिया जाता है। इसके बावजूद देख-रेख के अभाव में कहीं पानी का टोटा है, तो कहीं पाइपलाइन ही क्षतिग्रस्त है। कई जगह तो बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। ऐसे में सरकार की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। सरकारी आंकड़ों में 546 ग्राम पंचायतों में 10 को छोड़कर 536 पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन हकीकत में 50 फीसदी से अधिक शौचालय महीनों नहीं खुलते हैं। जिससे लोगों को खुले में शौच जाना पड़ रहा है। अभोली के नेवादा रोही में सामुदायिक शौचालय बाहर से चकाचक हो चुका है, लेकिन अंदर न तो सेफ्टी टैंक पूर्ण हो सका है और न ही शेड लग सके। डीघ के बेलहुआ गांव में बना शौचालय भी अंदर से ढाक के पात वाली कहावत जैसा है। बिछिया गांव में बना शौचालय भी विद्युत कनेक्शन नहीं होने के कारण बदहाल है। मान शाहपुर का सामुदायिक शौचालय अभी अधूरा है। भदोही और औराई ब्लॉक में चार-चार, सुरियावां और अभोली में एक-एक शौचालय जमीन के अभाव में शुरू नहीं हो सके। ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराकर भले ही स्वच्छता लाने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शौचालय संचालन के नाम पर मिले डेढ़ करोड़ पारिश्रमिक स्वयं सहायता समूह हजम कर गए लेकिन चार माह बाद भी ताला नहीं खुला। ग्रामीण खुले में जाने को विवश हो रहे हैं। इससे स्वच्छता पर सवाल उठना लाजिमी है। दिसंबर 2021 में जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने अन्य विभाग के अधिकारियों को लगाकर इसकी जांच भी कराईं थीं। जांच में पाया गया था कि कहीं पर शौचालय का निर्माण अपूर्ण हैं तो कहीं पर ताला लटक हुआ है। उन्होंने सभी छह ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारियों अतिशीघ्र शौचालयों का संचालन शुरू कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है। सामुदायिक शौचालय के संचालन के लिए एडीओ पंचायतों को पत्र लिखा गया है। किन कारणों से नहीं शुरू हो रहे हैं, उसकी भी रिपोर्ट मांगी गई है। जहां पर भी बंद पाया जाएगा वहां के सचिव के खिलाफ कार्रवाई होगी - बालेशधर द्विवेदी, डीपीआरओ

अभोली के नेवादा रोही में अधूरा सामुदायिक शौचालय। संवाद- फोटो : BHADOHI