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Bhadohi News: खुद देख नहीं सकते पर सैकड़ों का जीवन कर रहे रोशन

Tue, 10 Oct 2023 12:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 12:23 AM IST
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Can't see myself but are brightening the lives of hundreds
ज्ञानपुर। इच्छाशक्ति मजबूत हो तो दिव्यांग होना सफलता की राह में बाधक नहीं बनता। इसे साबित किया है भदोही के खेमईपुर निवासी दृष्टिबाधित डॉ.अजय कुमार सरोज ने। तीन साल की अल्प आयु में बीमारी से अजय की आंखों की रोशनी चली गई थी, लेकिन अब वे कईयों की जिंदगी को रोशन बना रहे हैं।
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खेमईपुर निवासी डॉ. अजय कुमार सरोज की जिंदगी काफी संघर्ष भरी है। जन्म के तीसरे साल दवाओं के कुप्रभाव के कारण आंखों की रोशनी चली गई। उन्होंने बताया कि जब मैंने होश संभाला तो मेरे जीवन में अंधकार ही अंधकार था। उसी समय मैंने ठाना कि मुझे इसी को हथियार बनाना है और समाज में शिक्षा की ज्योत जलानी है। उसी समय से मैंने मेहनत शुरू की और आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं। बताया कि चार भाइयों में तीसरे नंबर का हूं। आंखों की रोशनी न होने से पिता का प्यार भी कम हो गया। उस समय मामा-नाना-नानी ही सहारा बने। सरकारी स्कूल में प्रतिदिन की पढ़ाई को कंठस्थ करता। उसके बाद किताबों की रिकार्डिंग और ब्रेनलिपि के माध्यम से पढ़ाई आगे बढ़ाई। 1999 में हाईस्कूल और 2001 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। परीक्षा में 55 और 58 फीसदी अंक मिला। उसके बाद एमए, एम-फील, जेआरएफ और पीएचडी की। उसके बाद कोरोना काल में दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में अस्थायी तौर पर सहायक प्राध्यापक, 2022 में वाराणसी के एक कॉलेज में और अगस्त 2023 से छत्तीसगढ़ के स्वॅ. डारण बाई तारम शासकीय महाविद्यालय गुरूर, जिला बालोद में सहायक प्राध्यापक के तौर पर पढ़ा रहे हैं। अजय ने बताया कि महाविद्यालय में छात्र-छात्राएं उनकी कक्षाओं में पूरा समय देते हैं। कई प्रोफेसर भी उनसे पठन-पाठन को लेकर चर्चा करते हैं।
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पूर्व राष्ट्रपति से मिल चुका है सम्मान
ज्ञानपुर। अजय कुमार सरोज ने बताया कि साल 2001 में विश्व स्तरीय स्टेनोटाइपिंग स्पर्धा का आयोजन किया गया था। जिसमें वह छठवें स्थान पर रहे। उस दौरान दिवंगत पूर्व राष्टपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने सम्मानित किया। 2003 में वाराणसी में शाटपुट प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
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साहित्य के क्षेत्र में भी बनाई पहचान
ज्ञानपुर। छात्रों को पढ़ाने के साथ ही अजय सरोज की साहित्य के क्षेत्र में भी काफी रूचि है। राहत इंदौरी को अपना गुरु मानते हैं। अब तक शब्द ब्रम्ह, देहात, सृजन समय और जांकृति जैसी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।
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