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कालीनों के मुरीद हुए जडेजा
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Fri, 07 Oct 2016 01:33 AM IST
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भदोही के एक कालीन शोरूम में कालीनों को देखते क्रिकेटर अजय जडेजा। अमर उजाला
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भदोही।पूर्व टेस्ट क्रिकेटर अजय जडेजा और आशीष नेहरा भी जनपद की कालीनों के मुरीद हैं। दोनों क्रिकेटरों ने परंपरागत हैंडनाटेड कालीनों को भारतीय शिल्पियों की नायाब कारीगरी बताया।
वाराणसी में एक सेमिनार में भाग लेने आए दोनों पूर्व क्रिकेटर सुबह भदोही पहुंचे। यहां पर्शियन नाटेड कालीन के बारे में जब उन्हें बताया गया कि उसके एक वर्ग इंच में 300 गांठें हैं तो वे आश्चर्यचकित हो गए।
नेहरा ने बुनकरों को भारत का गर्व बताया। हाजी अब्दुल रब अंसारी ने दोनों क्रिकेटरों को कालीनों का संग्रह दिखाया। नेहरा ने बताया कि पर्शियन कालीनें उन्होंने पाकिस्तान के पेशावर में देखी थीं। सीईपीसी उपाध्यक्ष ने उन्हें बताया कि यह कला पाकिस्तानियों ने भारत से ही सीखी है।
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जडेजा ने कहा कि खेलों मेंबच्चों की भागीदारी की चर्चा करते हुए कहा कि ओलंपिक में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए बच्चों को शुरू से खेलने की छूट देनी होगी। कहा कि बच्चों के विकास के लिए शिक्षा को बहुआयामी बनाना होगा। उन्होंने बताया कि वे खुद बचपन में स्कूल के बहाने खेल मैदान में पहुंच जाते थे। घर लौटने पर लोग खुश होते थे कि मैं पढ़ाई करके घर लौटा हूं।
उल्लेखनीय है कि भदोही नगर में कुछ घंटे बिता कर दोनों क्रिकेटर कार से इलाहाबाद रवाना हो गए। इस दौरान हाजी अब्दुल रब, हाजी शाहआलम, शाहिद एकराम, शाहिद जमाल, शाहनवाज अख्तर आदि ने दोनों क्रिकेटरों का स्वागत किया।
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वाराणसी में एक सेमिनार में भाग लेने आए दोनों पूर्व क्रिकेटर सुबह भदोही पहुंचे। यहां पर्शियन नाटेड कालीन के बारे में जब उन्हें बताया गया कि उसके एक वर्ग इंच में 300 गांठें हैं तो वे आश्चर्यचकित हो गए।
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नेहरा ने बुनकरों को भारत का गर्व बताया। हाजी अब्दुल रब अंसारी ने दोनों क्रिकेटरों को कालीनों का संग्रह दिखाया। नेहरा ने बताया कि पर्शियन कालीनें उन्होंने पाकिस्तान के पेशावर में देखी थीं। सीईपीसी उपाध्यक्ष ने उन्हें बताया कि यह कला पाकिस्तानियों ने भारत से ही सीखी है।
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जडेजा ने कहा कि खेलों मेंबच्चों की भागीदारी की चर्चा करते हुए कहा कि ओलंपिक में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए बच्चों को शुरू से खेलने की छूट देनी होगी। कहा कि बच्चों के विकास के लिए शिक्षा को बहुआयामी बनाना होगा। उन्होंने बताया कि वे खुद बचपन में स्कूल के बहाने खेल मैदान में पहुंच जाते थे। घर लौटने पर लोग खुश होते थे कि मैं पढ़ाई करके घर लौटा हूं।
उल्लेखनीय है कि भदोही नगर में कुछ घंटे बिता कर दोनों क्रिकेटर कार से इलाहाबाद रवाना हो गए। इस दौरान हाजी अब्दुल रब, हाजी शाहआलम, शाहिद एकराम, शाहिद जमाल, शाहनवाज अख्तर आदि ने दोनों क्रिकेटरों का स्वागत किया।