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कालीन नगरी में दीपावली की धूम, रोशन हुआ कोना-कोना
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ज्ञानपुर। प्रकाश पर्व दीपावली रविवार को कालीन नगरी में धूमधाम से मनाया गया। कोने-कोने को दीये और झालर की लड़ियों से रोशन करने के साथ ही देर रात तक आतिशबाजी का दौर चला। शुभ मुहूर्त में घर-घर लक्ष्मी और गणेश का पूजन कर लोगों ने सुख-सौभाग्य की कामना की।
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के लंका फतह के बाद अयोध्या आगमन की खुशी में मनाए जाने वाले दीपावली पर्व का उत्साह रविवार को लोगों के सिर चढ़ कर बोला। पांच दिवसीय दीपोत्सव के तीसरे दिन मुख्य पर्व दीपावली मनाया जाता है। रविवार को असंख्य दीपों की लड़ियों से कालीन नगरी का कोना-कोना रोशन हो उठा। लक्ष्मी पूजन के कई मुहूर्त थे, लेकिन ज्यादातर लोगों ने पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद का मुहूर्त चुना। लक्ष्मी पूजन के बाद जगह-जगह सुंदर कांड और हनुमान चालीसा पाठ के आयोजन हुए। इस दौरान जयकारे और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय होता रहा। सरकारी, गैरसरकारी और निजी भवन झालरों से लकदक सजाए गए थे। इससे त्योहार का उत्साह चरम पर दिखा। पूजा के बाद आतिशबाजी का क्रम शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। लोग पटाखे और फुलझड़ियां जला कर दिवाली का जश्न मना रहे थे। सबसे ज्यादा उत्साह छोटे बच्चों में देखा गया। पटाखा बाजार में बच्चों की पूरी दिन भीड़ लगी रही। इस बार ज्ञानपुर में पटाखा बाजार वीएनजीआईसी मैदान में लगा था। जबकि इससे पूर्व केएनपीजी कॉलेज के रामलीला मैदान में पटाखा बाजार लगाया जाता था। लक्ष्मी पूजन के लिए जिले के विभिन्न मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोग दीपदान कर देवी-देवताओं के समक्ष शीश नवाते रहे। हरिहरनाथ धाम, सेमराधनाथ, घोपइला, बड़े शिव और सीतामढ़ी आदि धार्मिक स्थलों पर शाम को मेले जैसा नजारा दिखा। ज्ञानपुर के अलावा गोपीगंज, औराई, चौरी, दुर्गागंज, अभोली, पाली, मोढ़, सुरियावां, महाराजगंज, सीतामढ़ी, जंगीगंज, ऊंज आदि क्षेत्रों में भी दीपोत्सव की धूम मची रही। दीपावली के मद्देनजर बाजारों में भारी भीड़ रही। इसलिए सुरक्षा के इंतजाम में पुलिस चक्रमण करती दिखी।
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कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के लंका फतह के बाद अयोध्या आगमन की खुशी में मनाए जाने वाले दीपावली पर्व का उत्साह रविवार को लोगों के सिर चढ़ कर बोला। पांच दिवसीय दीपोत्सव के तीसरे दिन मुख्य पर्व दीपावली मनाया जाता है। रविवार को असंख्य दीपों की लड़ियों से कालीन नगरी का कोना-कोना रोशन हो उठा। लक्ष्मी पूजन के कई मुहूर्त थे, लेकिन ज्यादातर लोगों ने पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद का मुहूर्त चुना। लक्ष्मी पूजन के बाद जगह-जगह सुंदर कांड और हनुमान चालीसा पाठ के आयोजन हुए। इस दौरान जयकारे और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय होता रहा। सरकारी, गैरसरकारी और निजी भवन झालरों से लकदक सजाए गए थे। इससे त्योहार का उत्साह चरम पर दिखा। पूजा के बाद आतिशबाजी का क्रम शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। लोग पटाखे और फुलझड़ियां जला कर दिवाली का जश्न मना रहे थे। सबसे ज्यादा उत्साह छोटे बच्चों में देखा गया। पटाखा बाजार में बच्चों की पूरी दिन भीड़ लगी रही। इस बार ज्ञानपुर में पटाखा बाजार वीएनजीआईसी मैदान में लगा था। जबकि इससे पूर्व केएनपीजी कॉलेज के रामलीला मैदान में पटाखा बाजार लगाया जाता था। लक्ष्मी पूजन के लिए जिले के विभिन्न मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोग दीपदान कर देवी-देवताओं के समक्ष शीश नवाते रहे। हरिहरनाथ धाम, सेमराधनाथ, घोपइला, बड़े शिव और सीतामढ़ी आदि धार्मिक स्थलों पर शाम को मेले जैसा नजारा दिखा। ज्ञानपुर के अलावा गोपीगंज, औराई, चौरी, दुर्गागंज, अभोली, पाली, मोढ़, सुरियावां, महाराजगंज, सीतामढ़ी, जंगीगंज, ऊंज आदि क्षेत्रों में भी दीपोत्सव की धूम मची रही। दीपावली के मद्देनजर बाजारों में भारी भीड़ रही। इसलिए सुरक्षा के इंतजाम में पुलिस चक्रमण करती दिखी।
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