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तीन घंटे में डेढ़ फीट बढ़ा गंगा का जल स्तर,पलायनी की तैयारी
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ज्ञानपुर। उफनाई गंगा ने तटवर्ती इलाके के रहवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर रविवार को गंगा का जलस्तर 78.840 मीटर पहुंच गया। दोपहर बाद तक जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार पांच सेमी प्रति घंटा थी। इससे बाढ़ प्रभावित कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा गांवों में कटान तेज हो गई। रामपुर गंगा घाट के किनारे रहने वाले लोगों की गृहस्थी में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। इससे नाविक और उनका परिवार डेरा-डंडा उखाड़ने पर मजबूर हो गया।
गत चार दिनों से गंगा का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ने से तटवासियों को रहने और खाने की चिंता सताने लगी है। पांचवें दिन रविवार को रामपुर घाट पर गंगा के जलस्तर में तीन घंटे में डेढ़ फीट की बढ़ोतरी होने से तटवर्ती गांवों के लोग बेचैन हो उठे। तमाम परिवार पलायन के बारे में सोचने लगे। रामपुर, बिहरोजपुर, धनतुलसी, कलिंजरा, इब्राहिमपुर, विलासपुर, सीतामढ़ी, सेमरा आदि घाटों पर बने विश्रामलय बाढ़ के पानी की जद में आ चुके हैं। बाढ़ का पानी बस्तियों की ओर रुख करने से मदद की आवाज उठने लगी है। सीतामढ़ी संवाददाता के मुताबिक रविवार को गंगा ने पिछले वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान के करीब पहुंच गई। शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर 78.840 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार एक सेमी प्रति घंटा थी। सीतामढ़ी में 80 मीटर का जलस्तर खतरे का बिंदु माना जाता है। रविवार को सुबह जलस्तर में पांच सेमी प्रति घंटे की गति से बढ़ोतरी हो रही थी, जो दोपहर बाद तक घटकर तीन सेमी प्रति घंटा हो गई। लेकिन, इसके साथ ही कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा समेत कलातुलसी, इटहरा तरी, डीघ तरी, बनकट, बारीपुर गांवों में आंशिक कटान शुरू हो गई। गंगा की तेज धाराओं से उड़िया बाबा आश्रम के निर्माणाधीन संस्कृत विद्यालय पर खतरा मंडराने लगा है। विद्यालय पानी से घिरता जा रहा है। गंगा तटीय गांवों में खलबली मच गई है।
लालानगर संवाददाता के मुताबिक गैर प्रदेशों में हुई बरसात के असर से गंगा ने विकराल रूप धारण कर तटवर्ती क्षेत्रों में जीवन-यापन करने वालों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। दो दर्जन से अधिक तटीय गांव के गंगा के पानी से घिर कर फसलों को बर्बाद होने की नौबत है। गोपीगंज नगर से तीन किलोमीटर दूर स्थित रामपुर घाट पर गंगा का नजारा बाढ़ वाला हो गया है। घाट की सीढ़ियां डूबती जा रहीं हैं और किनारे रहने वाले लोगों की गृहस्थी बाढ़ से उजड़ने लगी है। रसीले वर्मा, नेबूलाल वर्मा, सुरेश, शिव वर्मा, मैना देवी, चंदा देवी, कड़ेदीन समेत दर्जन भर से अधिक ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर कोई व्यवस्था न मिलने पर परिवार समेत वह ऊंचे स्थानों पर टेंट-तंबू लगा कर शरण लेंगे। या बढ़ते जल स्तर के बीच गंगा में ही नावों पर समय काटा जाएगा। आरोप लगाया कि अभी तक प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है।
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गत चार दिनों से गंगा का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ने से तटवासियों को रहने और खाने की चिंता सताने लगी है। पांचवें दिन रविवार को रामपुर घाट पर गंगा के जलस्तर में तीन घंटे में डेढ़ फीट की बढ़ोतरी होने से तटवर्ती गांवों के लोग बेचैन हो उठे। तमाम परिवार पलायन के बारे में सोचने लगे। रामपुर, बिहरोजपुर, धनतुलसी, कलिंजरा, इब्राहिमपुर, विलासपुर, सीतामढ़ी, सेमरा आदि घाटों पर बने विश्रामलय बाढ़ के पानी की जद में आ चुके हैं। बाढ़ का पानी बस्तियों की ओर रुख करने से मदद की आवाज उठने लगी है। सीतामढ़ी संवाददाता के मुताबिक रविवार को गंगा ने पिछले वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान के करीब पहुंच गई। शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर 78.840 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार एक सेमी प्रति घंटा थी। सीतामढ़ी में 80 मीटर का जलस्तर खतरे का बिंदु माना जाता है। रविवार को सुबह जलस्तर में पांच सेमी प्रति घंटे की गति से बढ़ोतरी हो रही थी, जो दोपहर बाद तक घटकर तीन सेमी प्रति घंटा हो गई। लेकिन, इसके साथ ही कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा समेत कलातुलसी, इटहरा तरी, डीघ तरी, बनकट, बारीपुर गांवों में आंशिक कटान शुरू हो गई। गंगा की तेज धाराओं से उड़िया बाबा आश्रम के निर्माणाधीन संस्कृत विद्यालय पर खतरा मंडराने लगा है। विद्यालय पानी से घिरता जा रहा है। गंगा तटीय गांवों में खलबली मच गई है।
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लालानगर संवाददाता के मुताबिक गैर प्रदेशों में हुई बरसात के असर से गंगा ने विकराल रूप धारण कर तटवर्ती क्षेत्रों में जीवन-यापन करने वालों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। दो दर्जन से अधिक तटीय गांव के गंगा के पानी से घिर कर फसलों को बर्बाद होने की नौबत है। गोपीगंज नगर से तीन किलोमीटर दूर स्थित रामपुर घाट पर गंगा का नजारा बाढ़ वाला हो गया है। घाट की सीढ़ियां डूबती जा रहीं हैं और किनारे रहने वाले लोगों की गृहस्थी बाढ़ से उजड़ने लगी है। रसीले वर्मा, नेबूलाल वर्मा, सुरेश, शिव वर्मा, मैना देवी, चंदा देवी, कड़ेदीन समेत दर्जन भर से अधिक ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर कोई व्यवस्था न मिलने पर परिवार समेत वह ऊंचे स्थानों पर टेंट-तंबू लगा कर शरण लेंगे। या बढ़ते जल स्तर के बीच गंगा में ही नावों पर समय काटा जाएगा। आरोप लगाया कि अभी तक प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है।
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