जंगीगंज। एक ओर गंगा के बढ़ते जल स्तर को देख जिला प्रशासन बाढ़ चौकियों, एनडीआरएफ, पीएसी, केरोसिन, अनाज आदि की व्यवस्था कर प्रभावित होने वाले परिवारों को लेकर सजगता तो दिखाई जा रही है, लेकिन उससे भी कहीं अधिक परेशानी का सामना करने वाले ग्रामीण क्षेत्रों पर जिला पंचायत राज विभाग क्यों हाथ खींचने में लगा है, समझ से परे बना हुआ है। गांवों में जलनिकासी के रास्तों के अवरुद्घ हो जाने के कारण विकराल रूप धारण कर रहे जलप्लावन को लेकर ग्रामीणों की सांसे अटक गई है। मामला चाहे डीघ विकास खंड का दौरियाही गांव हो या फिर दरवांसी, रामकिशुनपुर-बसहीं, कुरमैचा, मानशाहपुर, सुधवैं, मैलौना, गोधना स्थित सूफीनगर-नईबस्ती। हर जगह ग्राम प्रधानों पर डीपीआरओ कार्यालय से बर्दाश्त प्राप्त होने से न तो पानी निकलने के लिए उचित प्रबंधन किए जा सके हैं और न ही बचाव के अन्य उपाय। नाली-नाला, पुलिया लगाने के नाम पर अब तक लाखों रुपये का वारा-न्यारा ही करना कार्यालय और ग्राम पंचायतों की शान साबित हो रही है। विभागीय अनदेखी के कारण दरवांसी स्थित पसियान बस्ती, दौरियाही गांव का मौर्य बस्ती, रामकिशुनपुर-बसहीं का चौहान और दलित बस्ती किसी भी मायने में उदाहरण देने में पीछे नहीं हटेंगी। एक सप्ताह से हो रही बारिश के पानी की जद में आकर उक्त गांवों की अनेकों बस्तियां पानी से सराबोर होकर दर्जनों परिवारों को बेघर करने को आतुर हैं। डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी का कहना था कि स्थलीय निरीक्षण करा कर जलजमाव से मुक्ति दिलाया जाएगा और ग्राम प्रधानों के कार्यप्रणाली की भी जांच होगी।