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अस्पताल में खुला मोबाइल नशामुक्ति केंद्र
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ज्ञानपुर। अब मोबाइल भी नशा बन चुका है। खतरनाक रेडिएशन की तरंगें सेहत पर बड़ा असर डाल रही हैं। इसकी वजह से मोबाइल से हमेशा चिपके रहने वाले लोग गंभीर और घातक बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। मोबाइल रोगियों की बढ़ती तादात के मद्देनजर शासन गंभीर हो गया है। मोबाइल नशा से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र खुल गया। परामर्शदाता भ्रमण कर लोगों को नशामुक्ति के प्रति जागरूक करेंगे।
सूबे की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. मधु सक्सेना के निर्देश पर जिला चिकित्सालय में दो दिन पूर्व मोबाइल नशा मुक्ति का शुभारंभ किया गया। परिसर में खुले मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र में मोबाइल के नशे से छुटकारा दिलाने के लिए मनोचिकित्सक से परामर्श और उपचार सुविधा प्रदान किया जाएगा, जिससे मरीज गंभीर समस्या से उबर सके। मनोचिकित्सक डॉ.अशोक पराशर ने बताया कि मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से शारीरिक एवं व्यवहारिक (मानसिक) स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे बच्चों समेत अन्य लोगों में आक्रामकता और चिड़चिड़ापन विकसित होता है। कुछ समय पहले व्लू व्हेल गेम खेलकर न जाने कितने बच्चों ने मौत को गले लगा लिया था। मन कक्ष में मोबाइल नशा मुक्ति की समुचित काउंसिलिंग शुरू हो गई है। परामर्श दाता डॉ.शांति आनंद ने बताया कि बच्चों में मोबाइल के लत की जिम्मेदार परिवार के सदस्य ही होते हैं। एकल परिवार होने के कारण पति और पत्नी दोनों ही अपने कामों में व्यस्त रहते हैं और बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा देते हैं और बच्चा मोबाइल का आदी हो जाता है। यदि उनके हाथों से थोड़े समय के लिए मोबाइल ले लिया जाए तो उन्हें घबराहट और बेचैनी शुरू हो जाती है।
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सूबे की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. मधु सक्सेना के निर्देश पर जिला चिकित्सालय में दो दिन पूर्व मोबाइल नशा मुक्ति का शुभारंभ किया गया। परिसर में खुले मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र में मोबाइल के नशे से छुटकारा दिलाने के लिए मनोचिकित्सक से परामर्श और उपचार सुविधा प्रदान किया जाएगा, जिससे मरीज गंभीर समस्या से उबर सके। मनोचिकित्सक डॉ.अशोक पराशर ने बताया कि मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से शारीरिक एवं व्यवहारिक (मानसिक) स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे बच्चों समेत अन्य लोगों में आक्रामकता और चिड़चिड़ापन विकसित होता है। कुछ समय पहले व्लू व्हेल गेम खेलकर न जाने कितने बच्चों ने मौत को गले लगा लिया था। मन कक्ष में मोबाइल नशा मुक्ति की समुचित काउंसिलिंग शुरू हो गई है। परामर्श दाता डॉ.शांति आनंद ने बताया कि बच्चों में मोबाइल के लत की जिम्मेदार परिवार के सदस्य ही होते हैं। एकल परिवार होने के कारण पति और पत्नी दोनों ही अपने कामों में व्यस्त रहते हैं और बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा देते हैं और बच्चा मोबाइल का आदी हो जाता है। यदि उनके हाथों से थोड़े समय के लिए मोबाइल ले लिया जाए तो उन्हें घबराहट और बेचैनी शुरू हो जाती है।
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