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पोषण पुनर्वास केंद्र के सभी बेड फुल, 10 पर भर्ती हुए 11 बच्चे
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महाराज चेत सिंह जिला चिकित्सालय में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। यहां उनकी 14 दिनों तक देखभाल की जाती है। बच्चा स्वस्थ होता है तो उसे अस्पताल से छुट्टी मिलती है। बच्चों के बेहतर इलाज के लिए यहां एक प्रभारी के साथ ही चिकित्सकीय स्टाफ रखा जाता है। हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जिले में भर्ती कराने लायक बच्चे न मिलने की वजह से यहां पांच-छह ही भर्ती रहते हैं। ऐसे में जिलाधिकारी आर्यका अखौरी इसको लेकर गंभीर हुईं और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को निर्देश देकर अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का निर्देश दिया। उसी आधार पर जब बच्चे खोजे गए तो सोमवार को जिला अस्पताल के एनआरसी का बेड फुल हो गया। यहां 10 बेड पर 11 बच्चे भर्ती कराए गए हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र में बीते तीन महीने के भीतर कभी पांच तो कभी छह बच्चे ही भर्ती होते थे। बीते कुछ महीने पहले तो संख्या दो व चार हो गई थी। इसको लेकर जिलाधिकारी ने समीक्षा की तो पता चला कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित करके नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे में तत्काल अभियान चलाकर बच्चों को चिह्नित करने का निर्देश दिया। जब अभियान चला तो एक ही दिन में चार बच्चे पहुंच गए। वहां दो भर्ती कराए गए। उनके भर्ती होते ही बेड फुल हो गए। अब अधिकारियों को चिंता है कि यदि और बच्चे आए तो उन्हें कहां भर्ती कराया जाएगा। कुल 5,873 बच्चे अति कुपोषित और 10,704 बच्चे कुपोषित हैं। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा का कहना है कि वजन और उम्र के हिसाब से जो बच्चे अति कुपोषित होते हैं, उन्हें चिह्नित करके पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। उन्हें वहां पोषक आहार दिया जाता है और ठीक होने पर छुट्टी मिलती है। केंद्र में किसी बच्चे को छुट्टी मिलने पर ही दूसरे को भर्ती कराया जाएगा।
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पोषण पुनर्वास केंद्र में बीते तीन महीने के भीतर कभी पांच तो कभी छह बच्चे ही भर्ती होते थे। बीते कुछ महीने पहले तो संख्या दो व चार हो गई थी। इसको लेकर जिलाधिकारी ने समीक्षा की तो पता चला कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित करके नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे में तत्काल अभियान चलाकर बच्चों को चिह्नित करने का निर्देश दिया। जब अभियान चला तो एक ही दिन में चार बच्चे पहुंच गए। वहां दो भर्ती कराए गए। उनके भर्ती होते ही बेड फुल हो गए। अब अधिकारियों को चिंता है कि यदि और बच्चे आए तो उन्हें कहां भर्ती कराया जाएगा। कुल 5,873 बच्चे अति कुपोषित और 10,704 बच्चे कुपोषित हैं। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा का कहना है कि वजन और उम्र के हिसाब से जो बच्चे अति कुपोषित होते हैं, उन्हें चिह्नित करके पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। उन्हें वहां पोषक आहार दिया जाता है और ठीक होने पर छुट्टी मिलती है। केंद्र में किसी बच्चे को छुट्टी मिलने पर ही दूसरे को भर्ती कराया जाएगा।
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