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सरकारी अस्पतालों में लक्ष्य के सापेक्ष नहीं हो रहे प्रसवु

Tue, 05 Sep 2017 12:43 AM IST
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:43 AM IST
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सरकारी अस्पतालों में लक्ष्य के सापेक्ष नहीं हो रहे प्रसवु
ज्ञानपुर (भदोही)।
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जिले में जननी सुरक्षा योजना की स्थिति ठीक नहीं है। योजना के संचालन की गति धीमी है। इस योजना के तहत जनपद के सरकारी अस्पतालों में वित्तीय वर्ष 2017-18 में 24471 गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि अप्रैल से अगस्त माह यानी पांच महीने में सरकारी अस्पतालों में केवल 8494 महिलाओं का ही प्रसव कराया जा सका है। यह लक्ष्य से लगभग दो हजार कम हैं।
हर महीने लक्ष्य का 8.33 फीसदी प्रसव सरकारी अस्पतालों में होना चाहिए। यानी दो हजार से अधिक प्रसव हर महीने सरकारी अस्पतालों में होगा तभी लक्ष्य पूरा हो सकेगा। पांच महीने में 34.71 फीसदी ही लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकी है। जबकि अब तक 41 फीसदी अधिक लक्ष्य पूरा हो जाना चाहिए था। पिछले वित्तीय वर्ष में भी सरकारी अस्पतालों में प्रसव का लक्ष्य 24471 था। इसके सापेक्ष 22820 प्रसव ही सरकारी अस्पतालों में कराए जा सके थे। जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सरकार महिलाओं को धनराशि देती है। ग्रामीण महिलाओं को प्रति प्रसव 1400 रुपये और नगरीय महिलाओं को प्रति प्रसव 1000 रुपये दिए जाते हैं। ये पैसे महिलाओं के बैंक खातों में भेजे जाते हैं। हालांकि पैसे महिलाओं को समय पर नहीं मिल पाते है। पैसे के लिए महिलाओं को परेशान होना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करने के लिए गांवों में तैनात आशा को भी प्रति प्रसव 600 रुपये दिए जाते हैं। जनपद में सुरक्षित प्रसव के प्रति महिलाओं को प्रेरित करने के लिए 1355 आशा बहनों की तैनाती की गई है। इसके बाद भी गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने कतराती हैं। इसकी वजह सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और लापरवाही है। आए दिन गांवों में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत होती रहती है, जो जननी सुरक्षा योजना पर सवाल खड़ा करती है। योजना के संचालन में खामियों को दर्शाती है। आवश्यकता इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और कुशल संचालन की है। तभी प्रसव के दौरान मौतें रुक सकेंगी।
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102 नंबर की 20 एंबुलेंस संचालित
ज्ञानपुर। गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में पहुंचाने के लिए जनपद में 102 नंबर की 20 एंबुलेंस संचालित है। इनके माध्यम से गर्भवती महिलाओं को बिना किराया लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंचाया जाता है। एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही से कभी-कभी एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती है, जिससे गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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कोट
जनपद के पांच सामुदायिक, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, इसके साथ ही 96 उच्चीकृत जच्चा-बच्चा केंद्र, जिला अस्पताल, एमबीएस भदोही में महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। फिर भी महिलाएं गांव में ही या निजी अस्पताल में प्रसव को वरीयता देती है। सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के प्रसव की गति बहुत धीमी नहीं है। वित्तीय वर्ष पूरा होने तक लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली धनराशि में देरी की वजह बैंकों के सर्वर में कमी के साथ-साथ अन्य कारण हैं। - सतीश सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी भदोही
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