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कलम फंसती देख एसडीएम ने बदला था पाला
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:51 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)। भदोही तहसील के हरियांव और महूबपुर गांव में जमीन के विवाद को लेकर एसडीएम के कथित ‘फर्जी हस्ताक्षर’ मामले में नया मोड़ आ गया है। ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ की जांच में ‘हस्ताक्षर’ एसडीएम के ही होने की बात का खुलासा होने से तत्कालीन एसडीएम आसाराम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भदोही तहसील क्षेत्र के महबूबपुर गांव के एक भूखंड और ईस्ट इंडिया कालीन कंपनी की जमीन के मामले में तत्कालीन एसडीएम आसाराम के हस्ताक्षर से एक पक्ष विशेष को फायदा पहुंचानेवाला आदेश पारित हुआ था। मामला हाईप्रोफाइल होने से शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंच गईं। विवाद बढ़ने के बाद खुद को फंसते देख एसडीएम आसाराम ने उक्त आदेश को फर्जी घोषित कर दिया। उन्होंनेे डीएम को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि जो भी आदेश हुए हैं, उसमें उनके ‘फर्जी हस्ताक्षर’ किए गए हैं। उन्होंने रिपोर्ट में पेशकार विश्वनाथ यादव, अहलमद न्यायालय उप जिलाधिकारी होरीलाल और लाभान्वित पक्ष विनीत कुमार को दोषी बताया। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तीनों के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया। इस प्रकरण में दो लोगों ने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली लेकिन एक कर्मी अब भी जेल में है। आरोप गंभीर होने पर पेशकार और अहलमद ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर एसडीएम के हस्ताक्षर की जांच ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ से कराने की मांग की थी। ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ विकास श्रीवास्तव को जांच के लिए नामित किया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच में पाया गया कि आदेश पर हस्ताक्षर तत्कालीन एसडीएम आसाराम के ही हैं। इस रिपोर्ट के बाद एसडीएम की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।
प्रकरण में हस्ताक्षर की जांच के लिए ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ को लगाया गया था। एसडीएम औराई मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा। विशाख जी, जिलाधिकारी ।
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भदोही तहसील क्षेत्र के महबूबपुर गांव के एक भूखंड और ईस्ट इंडिया कालीन कंपनी की जमीन के मामले में तत्कालीन एसडीएम आसाराम के हस्ताक्षर से एक पक्ष विशेष को फायदा पहुंचानेवाला आदेश पारित हुआ था। मामला हाईप्रोफाइल होने से शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंच गईं। विवाद बढ़ने के बाद खुद को फंसते देख एसडीएम आसाराम ने उक्त आदेश को फर्जी घोषित कर दिया। उन्होंनेे डीएम को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि जो भी आदेश हुए हैं, उसमें उनके ‘फर्जी हस्ताक्षर’ किए गए हैं। उन्होंने रिपोर्ट में पेशकार विश्वनाथ यादव, अहलमद न्यायालय उप जिलाधिकारी होरीलाल और लाभान्वित पक्ष विनीत कुमार को दोषी बताया। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तीनों के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया। इस प्रकरण में दो लोगों ने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली लेकिन एक कर्मी अब भी जेल में है। आरोप गंभीर होने पर पेशकार और अहलमद ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर एसडीएम के हस्ताक्षर की जांच ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ से कराने की मांग की थी। ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ विकास श्रीवास्तव को जांच के लिए नामित किया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच में पाया गया कि आदेश पर हस्ताक्षर तत्कालीन एसडीएम आसाराम के ही हैं। इस रिपोर्ट के बाद एसडीएम की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।
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प्रकरण में हस्ताक्षर की जांच के लिए ‘सिग्नेचर एक्सपर्ट’ को लगाया गया था। एसडीएम औराई मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा। विशाख जी, जिलाधिकारी ।
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