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179 स्कूलों के 935 भवन जर्जर, खतरे में मासूम
Updated Mon, 19 Nov 2018 11:43 PM IST
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ज्ञानपुर। शिक्षा विभाग के नए सर्वे में जिले के 15 फीसदी से अधिक प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के भवन जर्जर पाए गए हैं। एक से दो दशक पहले बिना मानक के बने भवन समय से पूर्व ही जर्जर हो चुके हैं। इन भवनों में पढ़ाई के दौरान बच्चों की जान जोखिम में रहती है। सर्वे में 179 विद्यालयों के 935 कक्ष जर्जर पाए गए हैं। खस्ताहाल भवनों में 17 हजार से ज्यादा मासूम पढ़ते हैं।
बुनियादी शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति उलट है। मानक के अनुसार भवनों का निर्माण नहीं होने पर वे निर्माण के बाद जल्द ही जर्जर हो रहे हैं। जिले में जूनियर और प्राइमरी के कुल 1113 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से 25 फीसदी विद्यालय एक दशक पुराने हैं। इनकी छतें, दीवारें, फर्श, खिड़की, दरवाजे सब कुछ जर्जर हो गए हैं। 75 फीसदी भवन सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2005 से 2013 तक बनवाए गए। मानक के अनुरूप निर्माण नहीं होने से इन स्कूलों के भवन कम समय में ही जर्जर होने लगे हैं। बारिश के बाद बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से जर्जर भवनों की रिपोर्ट मांगी थी। प्रत्येक ब्लॉक में सर्वे के दौरान 179 स्कूलों के 935 भवन जर्जर पाए गए। इनमें 95 फीसदी एक कक्षीय और द्विकक्षीय भवन हैं। बारिश के दौरान इन भवनों की छतों से पानी टपकता है और दरकी हुई दीवारों से सीमेंट की छपाई झड़ती है। इसकी बानगी डीघ के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिछियां में देखी जा सकती है। इसी तरह औराई, चौरी का लठियां, सुरियावां, अभोली और भदोही के कई विद्यालयों में बारिश के मौसम में कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो जाता है। विद्यार्थी ही नहीं, शिक्षक भी इस आशंका से परेशान रहते हैं कि कहीं भवन ढह गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।
बारिश के बाद कराए गए सर्वे में कई स्कूलों के भवन जर्जर पाए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रधानों से मरम्मत कराने के लिए कहा गया है। इन भवनों में कितने अनुपयोगी हो चुके हैं, उनकी सूची तैयार कराई जा रही है। 20 से अधिक कक्षा भवनों में कक्षाओं का संचालन बंद करवा दिया गया है। - अमित कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
बुनियादी शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति उलट है। मानक के अनुसार भवनों का निर्माण नहीं होने पर वे निर्माण के बाद जल्द ही जर्जर हो रहे हैं। जिले में जूनियर और प्राइमरी के कुल 1113 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से 25 फीसदी विद्यालय एक दशक पुराने हैं। इनकी छतें, दीवारें, फर्श, खिड़की, दरवाजे सब कुछ जर्जर हो गए हैं। 75 फीसदी भवन सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2005 से 2013 तक बनवाए गए। मानक के अनुरूप निर्माण नहीं होने से इन स्कूलों के भवन कम समय में ही जर्जर होने लगे हैं। बारिश के बाद बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से जर्जर भवनों की रिपोर्ट मांगी थी। प्रत्येक ब्लॉक में सर्वे के दौरान 179 स्कूलों के 935 भवन जर्जर पाए गए। इनमें 95 फीसदी एक कक्षीय और द्विकक्षीय भवन हैं। बारिश के दौरान इन भवनों की छतों से पानी टपकता है और दरकी हुई दीवारों से सीमेंट की छपाई झड़ती है। इसकी बानगी डीघ के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिछियां में देखी जा सकती है। इसी तरह औराई, चौरी का लठियां, सुरियावां, अभोली और भदोही के कई विद्यालयों में बारिश के मौसम में कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो जाता है। विद्यार्थी ही नहीं, शिक्षक भी इस आशंका से परेशान रहते हैं कि कहीं भवन ढह गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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बारिश के बाद कराए गए सर्वे में कई स्कूलों के भवन जर्जर पाए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रधानों से मरम्मत कराने के लिए कहा गया है। इन भवनों में कितने अनुपयोगी हो चुके हैं, उनकी सूची तैयार कराई जा रही है। 20 से अधिक कक्षा भवनों में कक्षाओं का संचालन बंद करवा दिया गया है। - अमित कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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