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जज्बा और जोश बनाए रखें, सरकार झुकेगी
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:37 AM IST
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ज्ञानपुर। कर्मचारी शिक्षक अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले कर्मचारी, शिक्षकों का धरना शुक्रवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या अधिक होने से तहसील परिसर समेत आसपास के इलाके में वाहनों की कतारे लग गईं। आंदोलन के कई सरकारी दफ्तरों में दिन भर ताला लटका रहा। अंत में संगठन की ओर से पीएम और सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा गया।
संगठन के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह ने कहा कि जोश और जज्बा बनाए रखें, सरकार को झुकाकर ही दम लिया जाएगा। सरकार उनकी मांगो पर ध्यान नहीं देगी तो 2019 में उसे सत्ता से हाथ धोना पड़ेगा। संयोजक धर्मराज यादव ने कहा कि तीन दिन की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। पुरानी पेंशन के लिए हर कुर्बानी दी जाएगी। सरकार को उनकी बातें माननी पड़ेगी। कहा कि पुरानी पेंशन से कर्मचारियों, शिक्षकों को भविष्य में काफी सहूलियत मिलती थी लेकिन वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है। इससे 60 साल नौकरी करने वाले कर्मचारी को अंत में कुछ नहीं मिलता। अगस्त क्रांति के रूप में जो बिगुल बजा है वह चिंगारी बन चुकी है। सरकार उनकी मांगो पर ध्यान नहीं देगी तो प्रदेश और देश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के आंदोलन में दो दिन के सापेक्ष तीसरे दिन अधिक भीड़ उमड़ी। जिले के विभिन्न हिस्सो से शिक्षक और कर्मचारी धरने में पहुंचे। पुरुषों संग महिलाओं ने भी धरने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आंदोलन को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस कार्यालय पर जहां ताला लटका रहा वहीं विकास भवन संग कई दफ्तरों में कर्मचारी के न रहने से सन्नाटा पसरा रहा। मौके पर राजेश पांडेय, घनश्याम यादव, देवी चरण, कृष्ण गोपाल, तेज बहादुर पाल, बीएल पाल, केके मौर्य, मनोज उपाध्याय, हरिश्चंद्र पाठक, अरूण कुमार पांडेय, शिव बहादुर यादव, रामधनी, पूजा मिश्रा, जया त्रिपाठी, राजबली, सुरेश पांडेय, समरजीत यादव समेत कई शिक्षक- कर्मचारी रहे।
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संगठन के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह ने कहा कि जोश और जज्बा बनाए रखें, सरकार को झुकाकर ही दम लिया जाएगा। सरकार उनकी मांगो पर ध्यान नहीं देगी तो 2019 में उसे सत्ता से हाथ धोना पड़ेगा। संयोजक धर्मराज यादव ने कहा कि तीन दिन की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। पुरानी पेंशन के लिए हर कुर्बानी दी जाएगी। सरकार को उनकी बातें माननी पड़ेगी। कहा कि पुरानी पेंशन से कर्मचारियों, शिक्षकों को भविष्य में काफी सहूलियत मिलती थी लेकिन वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है। इससे 60 साल नौकरी करने वाले कर्मचारी को अंत में कुछ नहीं मिलता। अगस्त क्रांति के रूप में जो बिगुल बजा है वह चिंगारी बन चुकी है। सरकार उनकी मांगो पर ध्यान नहीं देगी तो प्रदेश और देश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के आंदोलन में दो दिन के सापेक्ष तीसरे दिन अधिक भीड़ उमड़ी। जिले के विभिन्न हिस्सो से शिक्षक और कर्मचारी धरने में पहुंचे। पुरुषों संग महिलाओं ने भी धरने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आंदोलन को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस कार्यालय पर जहां ताला लटका रहा वहीं विकास भवन संग कई दफ्तरों में कर्मचारी के न रहने से सन्नाटा पसरा रहा। मौके पर राजेश पांडेय, घनश्याम यादव, देवी चरण, कृष्ण गोपाल, तेज बहादुर पाल, बीएल पाल, केके मौर्य, मनोज उपाध्याय, हरिश्चंद्र पाठक, अरूण कुमार पांडेय, शिव बहादुर यादव, रामधनी, पूजा मिश्रा, जया त्रिपाठी, राजबली, सुरेश पांडेय, समरजीत यादव समेत कई शिक्षक- कर्मचारी रहे।
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