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कामधेनु संचालकों ने कर्जमाफी की उठाई मांग
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:08 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
किसानों का फसली ऋण माफ होते ही कामधेनु डेयरी संचालकों ने भी कर्जमाफी के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है। बुधवार को कामधेनु, मिनी कामधेनु डेयरी संचालकों ने कर्जमाफी के लिए मुख्यमंत्री के नाम का मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।
जिला मुख्यालय पहुंचे कामधेनु डेयरी संचालकों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों, पशुपालकों को लॉलीपाप और धोखा देकर आर्थिक संकट में डाल दिया है। बैंकों में समस्त चल-अचल संपत्ति को बंधक रखकर हम लोगों का ऋण स्वीकृत हुआ है। संचालकों ने कहा कि देश के अन्य प्रदेशों से पशु क्रय करने के आदेश के चलते हम लोगों को गायों की दोगुनी कीमत चुकानी पड़ी। वहीं, दूध का उचित मूल्य भी नहीं मिल रहा है। इससे पशुओं के चारे की भी किल्लत उत्पन्न हो गई है। दूध बेचकर पशुओं का ठीक से भरणपोषण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि हम लोग अपना दूध पराग डेयरी को देते हैं। पराग 16 से 18 रुपये लीटर दूध खरीदता, जो बोतल बंद पानी से भी कम है। हम लोग 10 रुपये किलो भूसा और 20 रुपये किलो चोकर खरीदकर पशुओं को खिला रहे हैं। इससे गायों को खिलाने तक का पैसा नहीं निकलता है। संचालकों ने कहा कि मजदूरी काफी बढ़ गई है। ऐसे मेें बैंकों की कर्ज अदायगी में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कर्ज अदायगी के लिए पैसे नहीं बचे हैं। संपत्ति बंधक होने से हम लोग उसे बेच भी नहीं सकते। इसलिए कर्जमाफी आवश्यक है। मांग पत्र देने वालों में नागेंद्र बहादुर सिंह, इंद्रपाल सिंह, कृष्णानंद तिवारी, कल्लू सिंह, डॉ. आनंद मिश्र आदि कामधेनु संचालक शामिल थे।
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किसानों का फसली ऋण माफ होते ही कामधेनु डेयरी संचालकों ने भी कर्जमाफी के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है। बुधवार को कामधेनु, मिनी कामधेनु डेयरी संचालकों ने कर्जमाफी के लिए मुख्यमंत्री के नाम का मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।
जिला मुख्यालय पहुंचे कामधेनु डेयरी संचालकों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों, पशुपालकों को लॉलीपाप और धोखा देकर आर्थिक संकट में डाल दिया है। बैंकों में समस्त चल-अचल संपत्ति को बंधक रखकर हम लोगों का ऋण स्वीकृत हुआ है। संचालकों ने कहा कि देश के अन्य प्रदेशों से पशु क्रय करने के आदेश के चलते हम लोगों को गायों की दोगुनी कीमत चुकानी पड़ी। वहीं, दूध का उचित मूल्य भी नहीं मिल रहा है। इससे पशुओं के चारे की भी किल्लत उत्पन्न हो गई है। दूध बेचकर पशुओं का ठीक से भरणपोषण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि हम लोग अपना दूध पराग डेयरी को देते हैं। पराग 16 से 18 रुपये लीटर दूध खरीदता, जो बोतल बंद पानी से भी कम है। हम लोग 10 रुपये किलो भूसा और 20 रुपये किलो चोकर खरीदकर पशुओं को खिला रहे हैं। इससे गायों को खिलाने तक का पैसा नहीं निकलता है। संचालकों ने कहा कि मजदूरी काफी बढ़ गई है। ऐसे मेें बैंकों की कर्ज अदायगी में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कर्ज अदायगी के लिए पैसे नहीं बचे हैं। संपत्ति बंधक होने से हम लोग उसे बेच भी नहीं सकते। इसलिए कर्जमाफी आवश्यक है। मांग पत्र देने वालों में नागेंद्र बहादुर सिंह, इंद्रपाल सिंह, कृष्णानंद तिवारी, कल्लू सिंह, डॉ. आनंद मिश्र आदि कामधेनु संचालक शामिल थे।
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