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तेज हवा के साथ शाम को हुई बूंदा-बांदी
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ज्ञानपुर। अचानक मौसम बदलने से किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सुबह से शुरू हुई मौसम में उठा-पटक, धूप-छांव पूरे दिन जारी रही। शाम को तेज हवा के साथ हल्की बूंदा-बांदी भी हुई। हालांकि इसके बावजूद दिनभर लोग उमसभरी गर्मी से बेहाल रहे। वहीं किसानों का मानना है की अगर बारिश के साथ ओले पड़े तो खासकर गेहूं और अरहर के किसानों का काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मंगलवार की सुबह से आसमान में बादल छाए रहने के साथ धुंध जैसा मौसम बना रहा। आसमान में बादलों की उमड़-धुमड़ दिनभर जारी रही। इस बीच शाम पांच बजे तेज हवा के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई। इसके बावजूद मौसम के तापमान में कोई विशेष अंतर नहीं आया। इससे दिनभर उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल रहे। वहीं मौसम के करवट बदलने से किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। क्योंकि अभी बड़ी संख्या में किसानों की कटी हुई फसल खेतों में है। मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों ने तेजी से फसल को सहेजना शुरू कर दिया।
वेदपुर गांव निवासी हरिशंकर, लखनो निवासी संजय उपाध्याय, चक कलूटी निवासी घंटी ने बताया कि फसल की लगभग कटाई हो चुकी है। लेकिन अभी गेहूं और अरहर की ज्यादातर फसलें खेतों में ही हैं। अगर बारिश और ओला पड़ा तो किसानों की मेहनत पर ग्रहण लग सकता है। केवीके बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि बारिश हुई तो काटकर खेतों में छोड़ी गई फसल को ही थोड़ा नुकसान हो सकता है। सब्जियों की खेती के लिए यह बारिश फायदेमंद रहेगी।
मंगलवार की सुबह से आसमान में बादल छाए रहने के साथ धुंध जैसा मौसम बना रहा। आसमान में बादलों की उमड़-धुमड़ दिनभर जारी रही। इस बीच शाम पांच बजे तेज हवा के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई। इसके बावजूद मौसम के तापमान में कोई विशेष अंतर नहीं आया। इससे दिनभर उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल रहे। वहीं मौसम के करवट बदलने से किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। क्योंकि अभी बड़ी संख्या में किसानों की कटी हुई फसल खेतों में है। मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों ने तेजी से फसल को सहेजना शुरू कर दिया।
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वेदपुर गांव निवासी हरिशंकर, लखनो निवासी संजय उपाध्याय, चक कलूटी निवासी घंटी ने बताया कि फसल की लगभग कटाई हो चुकी है। लेकिन अभी गेहूं और अरहर की ज्यादातर फसलें खेतों में ही हैं। अगर बारिश और ओला पड़ा तो किसानों की मेहनत पर ग्रहण लग सकता है। केवीके बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि बारिश हुई तो काटकर खेतों में छोड़ी गई फसल को ही थोड़ा नुकसान हो सकता है। सब्जियों की खेती के लिए यह बारिश फायदेमंद रहेगी।
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