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डाक्टर साहब आवास पर देख रहे मरीज, ओपीडी में नदारत
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ज्ञानपुर। सरकारी चिकित्सकों की मनोवृत्ति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल की ओपीडी छोड़कर घर पर मरीजों को दवा की पर्ची काटने का काम इन दिनों जिले के सरकारी अस्पतालों में तेज हो गया है। जिला अस्पताल के चिकित्सक अपने घर पर मरीजों को परामर्श देते दिखे, जबकि दूसरी ओर अस्पताल की ओपीडी में दूर-दराज से आए मरीज उनका इंतजार कर रहे थे।
चंद रोज पहले ही मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम में सरकारी चिकित्सकों को सरकारी तनख्वाह लेकर निजी प्रैक्टिस न करने की नसीहत दी थी, लेकिन जिले के चिकित्सकों पर उसका भी कोई असर नहीं है। हर रोज घंटेभर से ज्यादा समय तक ओपीडी से गायब रहने वाले चिकित्सकों की मनमानी के कारण मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सक घर पर मरीजों का उपचार करते हैं। जिला चिकित्सालय की ओपीडी से आए दिन कई डॉक्टर दोपहर में घंटेभर से ज्यादा समय तक नदारद रहते हैं। इससे दूर-दराज से आए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को भी चिकित्सालय की ओपीडी का कुछ ऐसा ही हाल रहा। ओपीडी में कई डाक्टरों की कुर्सी खाली रही। मरीजों ने बताया कि डाक्टर साहब का घंटेभर से ओपीडी में नहीं हैं।
ज्ञानपुर से बच्चे को दिखाने गए मुकेश कुमार ने बताया कि घंटेभर इंतजार के बावजूद डॉक्टर नहीं आए हैं। इसी प्रकार अलग-अलग जगह से दिखाने आए रामसुख गौतम, सुलेखा देेवी, सुषमा श्रीवास्तव, मीना कुमारी, तबस्सुम, मनीराम सरोज, कामता प्रसाद, हरिकेश कुमार ने बताया कि वह कई बार चिकित्सालय आ चुके हैं। लेकिन, हर बार उन्हें डाक्टर की प्रतीक्षा में घंटों बैठना पड़ता है। वहीं चिकित्सालय के कुछ चिकित्सक जिला चिकित्सालय स्थित अपने आवास पर मरीजों का उपचार करते हैं। उक्त समस्याओं पर सीएमएस डॉ. धरमवीर प्रसाद ने कहा कि आवास पर मरीजों को देखना कोई गलत बात नहीं है। ओपीडी से डाक्टरों के नदारद रहने के सवाल वह टाल गए। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अस्पताल की ओपीडी की बजाए आवास पर मरीजों को देखना गलत और गंभीर बात है। ओपीडी से गायब रहने वाले डाक्टरों की जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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चंद रोज पहले ही मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम में सरकारी चिकित्सकों को सरकारी तनख्वाह लेकर निजी प्रैक्टिस न करने की नसीहत दी थी, लेकिन जिले के चिकित्सकों पर उसका भी कोई असर नहीं है। हर रोज घंटेभर से ज्यादा समय तक ओपीडी से गायब रहने वाले चिकित्सकों की मनमानी के कारण मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सक घर पर मरीजों का उपचार करते हैं। जिला चिकित्सालय की ओपीडी से आए दिन कई डॉक्टर दोपहर में घंटेभर से ज्यादा समय तक नदारद रहते हैं। इससे दूर-दराज से आए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को भी चिकित्सालय की ओपीडी का कुछ ऐसा ही हाल रहा। ओपीडी में कई डाक्टरों की कुर्सी खाली रही। मरीजों ने बताया कि डाक्टर साहब का घंटेभर से ओपीडी में नहीं हैं।
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ज्ञानपुर से बच्चे को दिखाने गए मुकेश कुमार ने बताया कि घंटेभर इंतजार के बावजूद डॉक्टर नहीं आए हैं। इसी प्रकार अलग-अलग जगह से दिखाने आए रामसुख गौतम, सुलेखा देेवी, सुषमा श्रीवास्तव, मीना कुमारी, तबस्सुम, मनीराम सरोज, कामता प्रसाद, हरिकेश कुमार ने बताया कि वह कई बार चिकित्सालय आ चुके हैं। लेकिन, हर बार उन्हें डाक्टर की प्रतीक्षा में घंटों बैठना पड़ता है। वहीं चिकित्सालय के कुछ चिकित्सक जिला चिकित्सालय स्थित अपने आवास पर मरीजों का उपचार करते हैं। उक्त समस्याओं पर सीएमएस डॉ. धरमवीर प्रसाद ने कहा कि आवास पर मरीजों को देखना कोई गलत बात नहीं है। ओपीडी से डाक्टरों के नदारद रहने के सवाल वह टाल गए। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अस्पताल की ओपीडी की बजाए आवास पर मरीजों को देखना गलत और गंभीर बात है। ओपीडी से गायब रहने वाले डाक्टरों की जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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