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किसानों की कमर तोड़ रहे छुट्टा मवेशी
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ज्ञानपुर। शासन-प्रशासन की तमाम कवायद के बाद भी किसानों की मुश्किल कम होती नहीं दिख रही है। छुट्टा मवेशी किसानों की कमर तोड़ दे रहे हैं। छुट्टा पशु देखते ही देखते गेहूं संग अन्य फसलों को नष्ट कर देते हैं। बैराखास और परऊपुर में झुंडो में पहुंचे मवेशियों को लेकर किसान चिंतित हो गए हैं। प्रशासन से अविलंब ठोस कदम उठाने की मांग की।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद गोवंश तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाया गया। तस्करी पर लगाम लगा तो े मवेशियों की बाढ़ सी आ गई। जगह-जगह मवेशियों ने फसलों को नष्ट करना शुरू कर दिया। पिपरिस में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से गोशाला भी बनाने की कवायद चल रही है लेकिन फिलहाल छुट्टा मवेशी किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। ज्ञानपुर से सटे बैराखास गांव में बुधवार की रात 50 से अधिक की संख्या में मवेशी झुंड में पहुंचे। इस दौरान मवेशियों ने गांव के ही मदनमोहन, अमरीश चंद्र, गोपाल, सुनील, लल्लन उपाध्याय, कैलाश, रमेश, मगन लाल, जगदंबा प्रसाद समेत 20 से अधिक किसानों के फसल को नुकसान पहुंचाया। इसी तरह परऊपुर गांव में भी बड़ी संख्या में छुट्टा पशु किसानों की फसलां को नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्वतंत्रता सग्राम सेनानी झूरी सिंह के वंशज रामेश्वर सिंह ने प्रशासन से अविलंब इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
हफ्तेभर से 15 छुट्टा पशुओं को खिला रहे चारा
ज्ञानपुर। छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान न पहुंचे इसके लिए वेदपुर गांव निवासी धीरेंद्र यादव एक सप्ताह से 15 मवेशियों को चारा-पानी दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उन पशुओं को बांधकर न खिलाते तो वे फसलों को नुकसान पहुंचाते। एक बार वाहन पर लादकर छुट्टा मवेशियों को गोशाला ले गए, लेकिन वहां जगह नहीं होने का हवाला देते हुए लौटा दिया गया। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि छुट्टा पशुओं की समस्या से किस तरह निजात पाई जाए।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद गोवंश तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाया गया। तस्करी पर लगाम लगा तो े मवेशियों की बाढ़ सी आ गई। जगह-जगह मवेशियों ने फसलों को नष्ट करना शुरू कर दिया। पिपरिस में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से गोशाला भी बनाने की कवायद चल रही है लेकिन फिलहाल छुट्टा मवेशी किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। ज्ञानपुर से सटे बैराखास गांव में बुधवार की रात 50 से अधिक की संख्या में मवेशी झुंड में पहुंचे। इस दौरान मवेशियों ने गांव के ही मदनमोहन, अमरीश चंद्र, गोपाल, सुनील, लल्लन उपाध्याय, कैलाश, रमेश, मगन लाल, जगदंबा प्रसाद समेत 20 से अधिक किसानों के फसल को नुकसान पहुंचाया। इसी तरह परऊपुर गांव में भी बड़ी संख्या में छुट्टा पशु किसानों की फसलां को नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्वतंत्रता सग्राम सेनानी झूरी सिंह के वंशज रामेश्वर सिंह ने प्रशासन से अविलंब इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
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हफ्तेभर से 15 छुट्टा पशुओं को खिला रहे चारा
ज्ञानपुर। छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान न पहुंचे इसके लिए वेदपुर गांव निवासी धीरेंद्र यादव एक सप्ताह से 15 मवेशियों को चारा-पानी दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उन पशुओं को बांधकर न खिलाते तो वे फसलों को नुकसान पहुंचाते। एक बार वाहन पर लादकर छुट्टा मवेशियों को गोशाला ले गए, लेकिन वहां जगह नहीं होने का हवाला देते हुए लौटा दिया गया। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि छुट्टा पशुओं की समस्या से किस तरह निजात पाई जाए।
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