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मूर्छित हुए लखन, रामसेना में सियापा
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:49 AM IST
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ज्ञानपुर/चौरी। चौरी इलाके के लठिया में चल रही रामलीला में शुक्रवार की रात विभीषण शरणागत और लक्ष्मण शक्ति के प्रसंगों का मंचन किया गया। बड़ी संख्या में लोग देखने के लिए पहुंचे थे। वहीं, सरई पठखानी की रामलीला में नक्कटैया, सीता हरण और रावण-जटायु की लीला हुई। लठिया में शुक्रवार की रात में मंचन के दौरान लंका से जैसे ही हनुमान जी सीता की खोज कर वापस लौटे रामदल में खुशी की लहर दौड़ गई। रावण अपने भाई विभीषण की सलाह न मानकर उसे राज्य से निकाल दिया, जिससे विभीषण प्रभु राम की शरण में आ गया। लंका पर चढ़ाई करने के लिए राम समुद्र से रास्ता मांगते हैं, लेकिन समुद्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्रोधित होकर समुद्र को सुखाने के लिए राम तैयार हो जाते हैं, लेकिन तभी समुद्र प्रकट होकर गुहार लगाता है। उसके बाद नल-नील के सहयोग से समुद्र पर रामसेतु का निर्माण होता है और लंका में राम सेना पहुंच जाती है। अंगद शांति दूत बनकर रावण के दरबार में जाते हैं। अंगद की बात रावण नहीं मानता। युद्ध शुरू होता है। रावण के दो पुत्रों और भाई कुंभकर्ण का वध होने के बाद मेघनाद आता है। घनघोर युद्ध के बाद मेघनाद ने शक्ति बाण चला दी, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। इससे रामदल में सन्नाटा पसर गया। सुषैन वैद्य के कहने पर हनुमान बूटी ले आते हैं और लक्ष्मण ठीक हो जाते हैं। मौके पर व्यास कृपा शंकर पाठक, कृष्कांत त्रिपाठी, श्यामधर चौहान, धीरज त्रिपाठी, विपिन, छोटेलाल तिवारी, गुड्डू शर्मा, अरविंद तिवारी, बृजेश तिवारी आदि रहे। उधर जय श्रीराम रामलीला कमेटी सरई पठखानी की रामलीला में नक्कटैया के प्रसंग का मंचन किया गया। सुपर्णखा ने सुंदर स्त्री का वेश धारण कर राम और लक्ष्मण को विवाह का प्रस्ताव दिया। इस पर पहले तो दोनों राजकुमारों ने मना कर दिया, लेकिन वह जिद पर आई तो लक्ष्मण से उसकी नाक काट ली। इसके बाद जटायु वध और सीता हरण के प्रसंग का मंचन किया गया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दीर्घा में देर रात तक डटे रहे।
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