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कंबल कारखाने से भेड़पालकों को होगा फायदा
Updated Wed, 19 Jul 2017 12:27 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)। कंबल कारखाने को पुनर्जीवन मिलने के साथ ही करीब एक दशक से आर्थिक तंगहाली से गुजर रहे जिले के भेड़पालकों के अच्छे दिन की उम्मीद भी जाग गई है। गोपीगंज का कंबल कारखाना शुरू होने के साथ ही भेड़ों से निकलने वाले ऊन की मांग भी बढ़ जाएगी। इससे भेड़पालकों का मुनाफा भी बढ़ेगा।
मखमली कालीनों के लिए विश्वविख्यात भदोही जिले में करीब दो दशक तक पूर्वांचल के कई जिलों से ऊन की आपूर्ति होती थी। जिसे बाद में कालीन बनाने लायक बनाया जाता था। इससे भेड़ पालकों की स्थिति काफी हद तक बेहतर हो गई थी। अधिक लागत आने पर गत एक दशक से विदेशों से बनाए हुए ऊन की आमद जिले में होने लगी। इससे भेड़पालकों के ऊन की मांग घटने से उसकी कीमत गिर गई। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने गोपीगंज स्थित कंबल कारखाना चलाने के लिए 34.55 लाख रुपये स्वीकृत किया। कंबल कारखाना चालू होने पर भेड़पालकों के ऊन की मांग एक बार फिर बढ़ जाएगी, जिससे उनको काफी राहत मिलेगी।
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मखमली कालीनों के लिए विश्वविख्यात भदोही जिले में करीब दो दशक तक पूर्वांचल के कई जिलों से ऊन की आपूर्ति होती थी। जिसे बाद में कालीन बनाने लायक बनाया जाता था। इससे भेड़ पालकों की स्थिति काफी हद तक बेहतर हो गई थी। अधिक लागत आने पर गत एक दशक से विदेशों से बनाए हुए ऊन की आमद जिले में होने लगी। इससे भेड़पालकों के ऊन की मांग घटने से उसकी कीमत गिर गई। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने गोपीगंज स्थित कंबल कारखाना चलाने के लिए 34.55 लाख रुपये स्वीकृत किया। कंबल कारखाना चालू होने पर भेड़पालकों के ऊन की मांग एक बार फिर बढ़ जाएगी, जिससे उनको काफी राहत मिलेगी।
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