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महिलाएं अबला नहीं महारानी लक्ष्मीबाई स्वारूप हैं
Thu, 10 Jan 2019 12:24 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,भदोही
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Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jan 2019 12:24 AM IST
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नारी अबला नहीं, दुर्गा स्वरूपा हैं। प्रेम की प्रतिमूर्ति नारी जरूरत पड़ने पर लक्ष्मीबाई भी बन जाती है। वह अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों की सुरक्षा और सम्मान की अहमियत भी जानती है। बेटियां बढ़ेंगी तो देश बढ़ेगा, इस सोच के साथ युवा पीढ़ी आगे बढ़े, तभी नारी गरिमा को बढ़ाया जा सकेगा। यह बातें बुधवार को काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अमर उजाला की ओर आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स सजगता गोष्ठी में महाविद्यालय की छात्राओं और प्राध्यापकों ने कही।
वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने छात्राओं और छात्रों को नारी सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता की शपथ दिलाते हुए कहा कि नारी सजग है, उसे केवल प्रोत्साहित करने की जरूरत है। डॉ. शुभा श्रीवास्तव ने कहा कि देश और समाज के विकास में महिलाओं का अहम योगदान है। समय के साथ आए बदलाव से महिलाएं स्वावलंबी बनने की राह पर चल पड़ी हैं। महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह से जागरूक हो चुकीं हैं।
डॉ मनीषा यादव ने कहा कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना खुद में बड़ी ताकत का एहसास कराता है। महिलाएं हर स्थिति का डटकर मुकाबला कर रहीं हैं। डॉ. कल्पना वर्मा ने कहा कि महिलाएं परिस्थिति के अनुसार दया और दंड के विधान को अपनाकर नारी सशक्तीकरण को नई दिशा देने का काम कर रहीं हैं। डॉ. कामिनी वर्मा, डॉ. हेमंत निराला और डॉ. किरन शर्मा ने भी नारी सशक्तीकरण पर विचार व्यक्त किए। छात्रा सोनम उपाध्याय ने कहा कि नारी अबला नहीं हैं। वह महारानी लक्ष्मीबाई की स्वरूप है। नारी सक्षम हो चुकी है, जिससे वह हर क्षेत्र में बराबरी की भूूमिका निभा रही है। उपासना जायसवाल ने कहा कि महिलाएं आदिशक्ति हैं। वह दो घरों को रोशन करने वाली ऐसी चिराग हैं, जिनसे पूरा समाज रोशन होता है।
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महिलाओं को उनका अधिकार मिले, इसके लिए पुरुष समाज को भी आगे आना होगा। उन्हें अपने घर की बेटियों को शिक्षित बनाने के साथ ही अच्छे संस्कार दें। वह बेटे और बेटी के बीच का भेद भूलकर समानता का व्यवहार करें। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रमेश चंद्र यादव, डॉ. प्रभात कुमार वर्मा और डॉ. घनश्याम मिश्रा ने द्वीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कामिनी वर्मा ने किया।
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वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने छात्राओं और छात्रों को नारी सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता की शपथ दिलाते हुए कहा कि नारी सजग है, उसे केवल प्रोत्साहित करने की जरूरत है। डॉ. शुभा श्रीवास्तव ने कहा कि देश और समाज के विकास में महिलाओं का अहम योगदान है। समय के साथ आए बदलाव से महिलाएं स्वावलंबी बनने की राह पर चल पड़ी हैं। महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह से जागरूक हो चुकीं हैं।
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डॉ मनीषा यादव ने कहा कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना खुद में बड़ी ताकत का एहसास कराता है। महिलाएं हर स्थिति का डटकर मुकाबला कर रहीं हैं। डॉ. कल्पना वर्मा ने कहा कि महिलाएं परिस्थिति के अनुसार दया और दंड के विधान को अपनाकर नारी सशक्तीकरण को नई दिशा देने का काम कर रहीं हैं। डॉ. कामिनी वर्मा, डॉ. हेमंत निराला और डॉ. किरन शर्मा ने भी नारी सशक्तीकरण पर विचार व्यक्त किए। छात्रा सोनम उपाध्याय ने कहा कि नारी अबला नहीं हैं। वह महारानी लक्ष्मीबाई की स्वरूप है। नारी सक्षम हो चुकी है, जिससे वह हर क्षेत्र में बराबरी की भूूमिका निभा रही है। उपासना जायसवाल ने कहा कि महिलाएं आदिशक्ति हैं। वह दो घरों को रोशन करने वाली ऐसी चिराग हैं, जिनसे पूरा समाज रोशन होता है।
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महिलाओं को उनका अधिकार मिले, इसके लिए पुरुष समाज को भी आगे आना होगा। उन्हें अपने घर की बेटियों को शिक्षित बनाने के साथ ही अच्छे संस्कार दें। वह बेटे और बेटी के बीच का भेद भूलकर समानता का व्यवहार करें। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रमेश चंद्र यादव, डॉ. प्रभात कुमार वर्मा और डॉ. घनश्याम मिश्रा ने द्वीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कामिनी वर्मा ने किया।