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ढाई लाख के घपले में मरसड़ा के प्रधान बर्खास्त
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ज्ञानपुर। शौचालय निर्माण में ढाई लाख का घपला करने पर जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने डीघ के मरसड़ा गांव के ग्राम प्रधान हरिराम यादव को बर्खास्त कर दिया। एसडीएम को निर्देश दिया कि गांव के विकास के लिए एक सदस्य का नाम प्रस्तावित कर भेजें। परियोजना निदेशक की अंतिम जांच में दो लाख 52 हजार की धांधली होने की पुरिूट हुई है। प्रधान की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण से डीएम संस्तुष्ट नहीं हुए। डेढ़ माह पहले ही प्रधान का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज हो चुका था और ग्राम पंचायत अधिकारी हर्षवर्धन को निलंबित किया गया था।
मरसड़ा गांव के मनीष कुमार ओझा पुत्र देवीशंकर ओझा समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शपथपत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव में शौचालय निर्माण में व्यापक स्तर पर धांधली की गई है। डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। जिला समाज कल्याण अधिकारी, सहायक अभियंता लोक निर्माण और अधिशासी अभियंता जल निगम ने शौचालय निर्माण की जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि ग्रामसभा में 106 शौचालयों के लिए 12 लाख से अधिक धन आवंटित किया गया। इसमें 70 शौचालय का निर्माण आधा अधूरा मिला। जिसमें सात लाख से अधिक की गड़बड़ी सामने आई। जांच आख्या आने के बाद तत्कालीन डीएम विशाख जी ने गबन मानते हुए प्रधान का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया, जबकि सेक्रेटरी को निलंबित किया। प्रकरण की अंतिम जांच के लिए परियोजना निदेशक मनोज राय को नामित किया गया। पीडी की जांच में दो लाख 52 हजार का घपला मिला। प्रधान से 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। प्रधान की ओर से दिए स्पष्टीकरण से डीएम संस्तुष्ट नहीं हुए। मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने प्रधान को बर्खास्त कर दिया। डीएम राजेंद्र प्रसाद ने गांव के विकास कार्य कराने के लिए एक सदस्य का नाम प्रस्तावित करने का निर्देश एसडीएम को दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि घपले की रकम आधी प्रधान और आधी सचिव से वसूली जाएगी।
मरसड़ा गांव के मनीष कुमार ओझा पुत्र देवीशंकर ओझा समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शपथपत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव में शौचालय निर्माण में व्यापक स्तर पर धांधली की गई है। डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। जिला समाज कल्याण अधिकारी, सहायक अभियंता लोक निर्माण और अधिशासी अभियंता जल निगम ने शौचालय निर्माण की जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि ग्रामसभा में 106 शौचालयों के लिए 12 लाख से अधिक धन आवंटित किया गया। इसमें 70 शौचालय का निर्माण आधा अधूरा मिला। जिसमें सात लाख से अधिक की गड़बड़ी सामने आई। जांच आख्या आने के बाद तत्कालीन डीएम विशाख जी ने गबन मानते हुए प्रधान का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया, जबकि सेक्रेटरी को निलंबित किया। प्रकरण की अंतिम जांच के लिए परियोजना निदेशक मनोज राय को नामित किया गया। पीडी की जांच में दो लाख 52 हजार का घपला मिला। प्रधान से 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। प्रधान की ओर से दिए स्पष्टीकरण से डीएम संस्तुष्ट नहीं हुए। मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने प्रधान को बर्खास्त कर दिया। डीएम राजेंद्र प्रसाद ने गांव के विकास कार्य कराने के लिए एक सदस्य का नाम प्रस्तावित करने का निर्देश एसडीएम को दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि घपले की रकम आधी प्रधान और आधी सचिव से वसूली जाएगी।
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