{"_id":"5c1bcaf0bdec2256f87b2aa9","slug":"161545325296-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमदभागवत कथा ज्ञानयज्ञ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमदभागवत कथा ज्ञानयज्ञ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जंगीगंज। धनीपुर गांव में आयोजित श्रीमदभागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथावाचक ने आचार्य डॉ. रामानंद महाराज ने रास पंच अध्याय का मार्मिक वर्णन किया। कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।
कथा के छठवें दिन यजमान के रूप में अनिल कुमार मिश्र और पत्नी सरिता मिश्र ने पूजा संपन्न। कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का आयोजन भी किया गया। इसे धूमधाम से संपन्न कराया गया। भागवत कथा में आचार्य ने भगवान के मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि सांदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण, कालयवन का वध, उधव-गोपी संवाद, उधव के गोपियों को अपना गुरु बनाने, द्वारिका की स्थापना और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे। कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। कहा कि महारास लीला से ही जीवात्मा परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते हैं। कथा में भजन सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया... पर श्रोता भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। कथावाचक रामानंद महराज ने भी कथा सुनाई। कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के दौरान वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई। इस मौके पर अरुण मिश्र, नान्हक, अवनीश मिश्र, गुड्डू, शशिचंद मिश्र, सुशील मिश्र, राजबली उपाध्याय, राहुल दूबे, प्रिंस मिश्र, प्रणव त्रिपाठी, जयकुमार तिवारी, अंकुर मिश्र, अखिलेश मिश्र, रत्नेश मिश्र, दीपक मिश्र आदि लोग मौजूद रहे।
-
कथा के छठवें दिन यजमान के रूप में अनिल कुमार मिश्र और पत्नी सरिता मिश्र ने पूजा संपन्न। कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का आयोजन भी किया गया। इसे धूमधाम से संपन्न कराया गया। भागवत कथा में आचार्य ने भगवान के मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि सांदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण, कालयवन का वध, उधव-गोपी संवाद, उधव के गोपियों को अपना गुरु बनाने, द्वारिका की स्थापना और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे। कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। कहा कि महारास लीला से ही जीवात्मा परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते हैं। कथा में भजन सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया... पर श्रोता भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। कथावाचक रामानंद महराज ने भी कथा सुनाई। कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के दौरान वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई। इस मौके पर अरुण मिश्र, नान्हक, अवनीश मिश्र, गुड्डू, शशिचंद मिश्र, सुशील मिश्र, राजबली उपाध्याय, राहुल दूबे, प्रिंस मिश्र, प्रणव त्रिपाठी, जयकुमार तिवारी, अंकुर मिश्र, अखिलेश मिश्र, रत्नेश मिश्र, दीपक मिश्र आदि लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
-