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दुबई से 1
Updated Fri, 14 Dec 2018 12:09 AM IST
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मोढ़। भदोही कोतवाली क्षेत्र के डुड़वा धर्मपुर निवासी 38 वर्षीय मो.शाहिद की बीते 24 नवंबर को दुबई में मौत के 18 दिन बाद गुरूवार को शव घर लाया गया। बाबतपुर से एंबुलेंस से शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। छोटे छोटे चार बच्चे और पत्नी शाहजहां का रो- रो कर बुरा हाल हो गया। उन्हें सांत्वना देने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। शव घर आने के मुश्किल से एक घंटे के बाद गांव के ही कब्रिस्तान में शव को सुपुर्देखाक किया गया।
दो भाईयों में बड़े शाहिद कालीन बुनाई करते थे। घर की माली हालत दयनीय देखते हुए तथा गर्दिश के दिनों से उबारने के लिए दुबई में काम करने का फैसला किया था। अथक प्रयास और काफी भाग दौड़ भाग के बाद गत वर्ष जनवरी महीने में वह दुबई जा पहुंचे। वहां से बच्चों की पढाई, कपड़े और गृहस्थी के खर्चे भेजते थे तो घर चलता था। छोटा भाई मो.समीर जो आटो रिक्शा चलाता है ने बताया कि दुबई में क्षेत्र के कुछ और लोग हैं। गत माह 24 तारीख को फोन आया कि हृदय गति रुकने से शाहिद की मौत हो गई है तो पूरा घर सन्न रह गया। बकौल समीर बड़ी मुश्किल से कलेजे पर पत्थर रखकर भाभी और उनके बच्चों को उसने यह बात बताई गई।
उधर बाप और पति की मौत की खबर सुनते ही बच्चे और पत्नी बेहाल हो गए वे लोग उनकी एक झलक पाने को बेताब थे। आंखों से नीद उड़ गई। हर रोज उन्हें घर लाने की बातें होती लेकिन यह नहीं सूझ रहा था कि आखिर उनका शव कैसे लाया जाए। छोटे भाई के अनुसार नियोक्ता अच्छा था लिहाजा उसने शव को भदोही भेजने का आश्वासन दिया और आवश्यक खानापूर्ति कर बुधवार को बाबतपुर की फ्लाइट से रवाना कर हम लोगों को सूचित किया। बुधवार की शाम 6 बजे शव घर पहुंचा तो भारी संख्या में लौग मौजूद थे। मुश्किल से एक घंटे के बाद गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्देखाक कर दिया गया।
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भदोही । दुबई में मो.शाहिद की मौत और शव सुपुर्देखाक किए जाने की जानकारी होने पर सपा जिलाध्यक्ष मो.आरिफ सिद्दीकी गुरुवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंचे। सपा जिलाध्यक्ष ने बताया कि चार बच्चे और सभी 16 वर्ष से कम के हों तो बिन बाप के उनकी गृहस्थी कैसे आगे बढ़ेगी यह अल्लाह ही जानता है। बताया कि पत्नी के पास राशन कार्ड है तथा प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया हुआ है। कहा कि यदि शासन से मदद नहीं मिली तो बच्चों की पढ़ाई रुक जाएगी साथ ही अभागे परिवार के लिए घर चला पाना मुश्किल हो जाएगा। कच्ची गृहस्थी देखते हुए उन्होंने प्रशासन से शाहजहा की आर्थिक सहायता करने की मांग की।
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दो भाईयों में बड़े शाहिद कालीन बुनाई करते थे। घर की माली हालत दयनीय देखते हुए तथा गर्दिश के दिनों से उबारने के लिए दुबई में काम करने का फैसला किया था। अथक प्रयास और काफी भाग दौड़ भाग के बाद गत वर्ष जनवरी महीने में वह दुबई जा पहुंचे। वहां से बच्चों की पढाई, कपड़े और गृहस्थी के खर्चे भेजते थे तो घर चलता था। छोटा भाई मो.समीर जो आटो रिक्शा चलाता है ने बताया कि दुबई में क्षेत्र के कुछ और लोग हैं। गत माह 24 तारीख को फोन आया कि हृदय गति रुकने से शाहिद की मौत हो गई है तो पूरा घर सन्न रह गया। बकौल समीर बड़ी मुश्किल से कलेजे पर पत्थर रखकर भाभी और उनके बच्चों को उसने यह बात बताई गई।
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उधर बाप और पति की मौत की खबर सुनते ही बच्चे और पत्नी बेहाल हो गए वे लोग उनकी एक झलक पाने को बेताब थे। आंखों से नीद उड़ गई। हर रोज उन्हें घर लाने की बातें होती लेकिन यह नहीं सूझ रहा था कि आखिर उनका शव कैसे लाया जाए। छोटे भाई के अनुसार नियोक्ता अच्छा था लिहाजा उसने शव को भदोही भेजने का आश्वासन दिया और आवश्यक खानापूर्ति कर बुधवार को बाबतपुर की फ्लाइट से रवाना कर हम लोगों को सूचित किया। बुधवार की शाम 6 बजे शव घर पहुंचा तो भारी संख्या में लौग मौजूद थे। मुश्किल से एक घंटे के बाद गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्देखाक कर दिया गया।
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भदोही । दुबई में मो.शाहिद की मौत और शव सुपुर्देखाक किए जाने की जानकारी होने पर सपा जिलाध्यक्ष मो.आरिफ सिद्दीकी गुरुवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंचे। सपा जिलाध्यक्ष ने बताया कि चार बच्चे और सभी 16 वर्ष से कम के हों तो बिन बाप के उनकी गृहस्थी कैसे आगे बढ़ेगी यह अल्लाह ही जानता है। बताया कि पत्नी के पास राशन कार्ड है तथा प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया हुआ है। कहा कि यदि शासन से मदद नहीं मिली तो बच्चों की पढ़ाई रुक जाएगी साथ ही अभागे परिवार के लिए घर चला पाना मुश्किल हो जाएगा। कच्ची गृहस्थी देखते हुए उन्होंने प्रशासन से शाहजहा की आर्थिक सहायता करने की मांग की।