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पुरानी किताबों के सहारे स्कूल जाएंगे नौनिहाल
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महीने भर के ग्रीष्मावकाश के बाद 16 जून से परिषदीय विद्यालय खुल जाएंगे, लेकिन नि:शुल्क किताबों का अभी तक अता-पता नहीं है। अभी तक नई पुस्तकें नहीं आई हैं और न ही इस संबंध में कोई निर्देश आया है। जाहिर है पुरानी किताबों के सहारे ही कक्षाएं संचालित होगी। ऐसे में सभी बच्चों तक पुरानी किताबें पहुंच पाना भी मुश्किल होगा।
प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तमाम योजनाएं संचालित हो रही है। बच्चों को यूनिफार्म, नि:शुल्क पुस्तक से लेकर दोपहर भोजन तक दिया जा रहा है तो शिक्षण कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नियमित विद्यालयों का निरीक्षण करने से लेकर अन्य तमाम योजनाएं संचालित हो रहीं हैं। बावजूद इसके शिक्षा के लिए सबसे अहम समझी जाने वाले किताबों की समय से उपलब्धता सुनिश्चित कराने को लेकर समय से कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
जिले में स्थित प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट मिलाकर कुल 892 विद्यालयों में अध्ययनरत दो लाख नौ हजार विद्यार्थियों के सामने किताबों का संकट खड़ा है। कारण है कि शासन स्तर से अभी तक नवीन सत्र की पाठ्य पुस्तकें प्रिंट होकर नहीं आ पाई है। ऐसी स्थिति में शासन स्तर से शैक्षिक सत्र 2021-22 में कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को वितरित की गई पाठ्य पुस्तकों को वापस लेकर बच्चों को उपलब्ध कराने को कहा गया है, हालांकि धरातल पर इसका असर कम ही देखने को मिलता है। पाचवीं तक की कक्षा में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों की किताबें फट जाती है जबकि जिन बच्चों की किताब रहती है वह गिने-चुने को ही मिल पाती है। सामुदायिक शिक्षा के जिला समन्वयक कल्पनाथ मिश्र ने बताया कि बच्चों की पुरानी पुस्तकों को जमा कराकर जरूरत के हिसाब से बच्चों को उपलब्ध कराने को कहा गया है। नई पुस्तकों की आमद के बाद बच्चों को वितरित किया जाएगा। प्रभारी बीएसए रमाकांत सिंह ने कहा कि नई किताबों को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। पुरानी किताबों से ही पठन-पाठन शुरू कराया जाएगा।
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प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तमाम योजनाएं संचालित हो रही है। बच्चों को यूनिफार्म, नि:शुल्क पुस्तक से लेकर दोपहर भोजन तक दिया जा रहा है तो शिक्षण कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नियमित विद्यालयों का निरीक्षण करने से लेकर अन्य तमाम योजनाएं संचालित हो रहीं हैं। बावजूद इसके शिक्षा के लिए सबसे अहम समझी जाने वाले किताबों की समय से उपलब्धता सुनिश्चित कराने को लेकर समय से कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
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जिले में स्थित प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट मिलाकर कुल 892 विद्यालयों में अध्ययनरत दो लाख नौ हजार विद्यार्थियों के सामने किताबों का संकट खड़ा है। कारण है कि शासन स्तर से अभी तक नवीन सत्र की पाठ्य पुस्तकें प्रिंट होकर नहीं आ पाई है। ऐसी स्थिति में शासन स्तर से शैक्षिक सत्र 2021-22 में कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को वितरित की गई पाठ्य पुस्तकों को वापस लेकर बच्चों को उपलब्ध कराने को कहा गया है, हालांकि धरातल पर इसका असर कम ही देखने को मिलता है। पाचवीं तक की कक्षा में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों की किताबें फट जाती है जबकि जिन बच्चों की किताब रहती है वह गिने-चुने को ही मिल पाती है। सामुदायिक शिक्षा के जिला समन्वयक कल्पनाथ मिश्र ने बताया कि बच्चों की पुरानी पुस्तकों को जमा कराकर जरूरत के हिसाब से बच्चों को उपलब्ध कराने को कहा गया है। नई पुस्तकों की आमद के बाद बच्चों को वितरित किया जाएगा। प्रभारी बीएसए रमाकांत सिंह ने कहा कि नई किताबों को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। पुरानी किताबों से ही पठन-पाठन शुरू कराया जाएगा।
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