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यूनिफार्म वितरण: दो फर्में फंसी, आरोप तय
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ज्ञानपुर। जिले के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में यूनिफार्म वितरण करने वाली 32 फर्मो में दो की गर्दन फंस गई है। एसआईबी की जांच में करीब एक करोड़ पांच लाख की राजस्व चोरी का मामला सामने आया है। एसआईबी के मंडलीय कमिश्नर ने फर्मों पर आरोप तय करते हुए विधिक कार्रवाई की संस्तुति कर दी है।
प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक बच्चे को जुलाई में दो जोड़ी यूनिफॉर्म सरकार की ओर से दिए जाते हैं। सत्र 2017-18 में जिले के 1.48 लाख छात्र-छात्राओं के यूनिफॉर्म के लिए करीब सात करोड़ रुपये शासन से आवंटित हुए थे। फर्मों के माध्यम से यूनिफॉर्म का वितरण कराया गया था। मानक के अनुसार पंजीकृत संस्थाओं को यूनिफॉर्म की सिलाई कराने के बाद वितरण करना था, लेकिन एक भी संस्था ने सिलाई नहीं कराई। सभी ने दुकानों से रेडीमेड ड्रेस खरीद कर स्कूलों को आपूर्ति कर दी। अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने डीएम और बीएसएस से मामले की शिकायत की थी। कार्रवाई न होने पर वाणिज्य कर विभाग को पत्र भेज कर आरोप लगाया कि फर्मों ने राजस्व की चोरी की। फर्मों की ओर से यूनिफॉर्म की सिलाई के जो केंद्र दर्शाए गए हैं, वे हैं ही नहीं। यही नहीं, फर्मों ने कोई टैक्स भी जमा नहीं किया। इस पर पूर्व में डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर विमल कुमार दूबे ने बीएसए को पत्र भेज कर कहा कि आपकी तरफ से जारी सिलाई केंद्रों की सूची में टैक्स एनवॉयस नंबर, धनराशि, व्यापारी की ओर से प्रस्तुत टैक्स में काफी अंतर है। डिप्टी कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्वाइंट कमिश्नर ओपी सिंह को पत्र भेजकर जांच का अनुरोध किया। इस पर ज्वाइंट कमिश्नर ने एसआईबी जांच को मंजूरी दे दी। शुरुआती जांच में पांच बड़ी फर्मों के अभिलेखों को खंगालना शुरू किया गया। इसमें मेसर्स अभिषेक इंटरप्राइजेज धनवतिया, जय मां विंध्यवासिनी सप्लायर्स मोढ़, लक्ष्मी कलेक्शन एवं गारमेंट्स ममहर, वीर इंटर प्राइजेज रामपुर जौनपुर और यश इंटरप्राइजेज रामपुर जौनपुर के रिटर्नों की जांच हुई। इनमें अब तक दो फर्म अभिषेक इंटरप्राइजेज धनवतिया पर 65 लाख 81 हजार 200 रुपये जबकि जय मां विंध्यवासिनी सप्लायर्स पर 37 लाख 81 हजार 932 की राजस्व चोरी पकड़ी गई। मंडलीय कमिश्नर रमेश कुमार सिंह ने जांच में पाया कि फर्मों ने जीएसटी की बड़ी चोरी की। उन्होंने दोनों फर्मों पर आरोप तय करते हुए जिलास्तरीय अधिकारियों को विधिक कार्रवाई की संस्तुति की।
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प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक बच्चे को जुलाई में दो जोड़ी यूनिफॉर्म सरकार की ओर से दिए जाते हैं। सत्र 2017-18 में जिले के 1.48 लाख छात्र-छात्राओं के यूनिफॉर्म के लिए करीब सात करोड़ रुपये शासन से आवंटित हुए थे। फर्मों के माध्यम से यूनिफॉर्म का वितरण कराया गया था। मानक के अनुसार पंजीकृत संस्थाओं को यूनिफॉर्म की सिलाई कराने के बाद वितरण करना था, लेकिन एक भी संस्था ने सिलाई नहीं कराई। सभी ने दुकानों से रेडीमेड ड्रेस खरीद कर स्कूलों को आपूर्ति कर दी। अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने डीएम और बीएसएस से मामले की शिकायत की थी। कार्रवाई न होने पर वाणिज्य कर विभाग को पत्र भेज कर आरोप लगाया कि फर्मों ने राजस्व की चोरी की। फर्मों की ओर से यूनिफॉर्म की सिलाई के जो केंद्र दर्शाए गए हैं, वे हैं ही नहीं। यही नहीं, फर्मों ने कोई टैक्स भी जमा नहीं किया। इस पर पूर्व में डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर विमल कुमार दूबे ने बीएसए को पत्र भेज कर कहा कि आपकी तरफ से जारी सिलाई केंद्रों की सूची में टैक्स एनवॉयस नंबर, धनराशि, व्यापारी की ओर से प्रस्तुत टैक्स में काफी अंतर है। डिप्टी कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्वाइंट कमिश्नर ओपी सिंह को पत्र भेजकर जांच का अनुरोध किया। इस पर ज्वाइंट कमिश्नर ने एसआईबी जांच को मंजूरी दे दी। शुरुआती जांच में पांच बड़ी फर्मों के अभिलेखों को खंगालना शुरू किया गया। इसमें मेसर्स अभिषेक इंटरप्राइजेज धनवतिया, जय मां विंध्यवासिनी सप्लायर्स मोढ़, लक्ष्मी कलेक्शन एवं गारमेंट्स ममहर, वीर इंटर प्राइजेज रामपुर जौनपुर और यश इंटरप्राइजेज रामपुर जौनपुर के रिटर्नों की जांच हुई। इनमें अब तक दो फर्म अभिषेक इंटरप्राइजेज धनवतिया पर 65 लाख 81 हजार 200 रुपये जबकि जय मां विंध्यवासिनी सप्लायर्स पर 37 लाख 81 हजार 932 की राजस्व चोरी पकड़ी गई। मंडलीय कमिश्नर रमेश कुमार सिंह ने जांच में पाया कि फर्मों ने जीएसटी की बड़ी चोरी की। उन्होंने दोनों फर्मों पर आरोप तय करते हुए जिलास्तरीय अधिकारियों को विधिक कार्रवाई की संस्तुति की।
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