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पारा फिर 44 पहुंचा, गर्मी से लोग हुए बेहाल
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ज्ञानपुर। भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। मई में रविवार को पारा 44 तक फिर पहुंच गया। इससे गर्मी के साथ ही उमस ने लोगों को पसीने से तर-बतर कर दिया। मौसम की मार और हर कोई बेहाल रहा। सूर्य के तप से धरती से भी आग निकल रही थी। बचने के लिए लोग चेहरे को ढंक कर निकले।
अप्रैल के दूसरे पखवारे से शुरू हुई गर्मी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। कभी कभार बादलों और हल्की बूंदाबांदी को छोड़ दिया जाए तो उमस और गर्मी लगातार कहर ढा रही है। महीने भर से अधिकतम पारा 40 से अधिक ही चल रहा है। रविवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया। गर्मी के बीच उमस का आलम यह है कि यह एक पल के लिए भी लोगों के तन और मन से जुदा नहीं हो पा रही है। इससे लोग बेचैन रह रहे हैं। तेज धूप के बीच आवागमन करने वालों का तन झुलस रहा है। मौसम की मार से सबसे ज्यादा परेशानी रिक्शा चलाने और दिहाड़ी मजदूरों को हो रही है। गर्मी और धूप में पसीना बहाने के बाद उनके घरों का चूल्हा जल रहा है। मकान की दीवारें गर्म हो गई थी। जिन लोगों का मकान एक मंजिला है, उनका पंखा पूरी तरह से गर्म हवा दे रहा था, जिससे उनका कमरा में रहना दुश्वार था। दोपहर में नगर की तमाम सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। नाममात्र के लोग ही आवागमन करते हुए दिखाई दिए।
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अप्रैल के दूसरे पखवारे से शुरू हुई गर्मी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। कभी कभार बादलों और हल्की बूंदाबांदी को छोड़ दिया जाए तो उमस और गर्मी लगातार कहर ढा रही है। महीने भर से अधिकतम पारा 40 से अधिक ही चल रहा है। रविवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया। गर्मी के बीच उमस का आलम यह है कि यह एक पल के लिए भी लोगों के तन और मन से जुदा नहीं हो पा रही है। इससे लोग बेचैन रह रहे हैं। तेज धूप के बीच आवागमन करने वालों का तन झुलस रहा है। मौसम की मार से सबसे ज्यादा परेशानी रिक्शा चलाने और दिहाड़ी मजदूरों को हो रही है। गर्मी और धूप में पसीना बहाने के बाद उनके घरों का चूल्हा जल रहा है। मकान की दीवारें गर्म हो गई थी। जिन लोगों का मकान एक मंजिला है, उनका पंखा पूरी तरह से गर्म हवा दे रहा था, जिससे उनका कमरा में रहना दुश्वार था। दोपहर में नगर की तमाम सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। नाममात्र के लोग ही आवागमन करते हुए दिखाई दिए।
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