फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   42 साल बाद परिजनों से मिलेंगे मुरलीधर

42 साल बाद परिजनों से मिलेंगे मुरलीधर

Sat, 09 Feb 2019 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2019 12:56 AM IST
विज्ञापन
42 साल बाद परिजनों से मिलेंगे मुरलीधर
औराई। 10 वीं में फेल होने के बाद पिता की डांट की डर से घर छोड़ चुके मुरलीधर का आखिरकार 42 साल बाद पता चल गया। उनके कोटा में होने की जानकारी मिलने पर परिजनों खुशी की लहर है। कोटा की एक स्वयंसेवी संस्था के संरक्षण में रह रहे मुरलीधर को लेकर उनके बड़े भाई और परिवारीजन कोटा से लेकर गांव पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन

औराई थानाक्षेत्र के सहसेपुर गांव निवासी मुरलीधर दुबे पुत्र सदानंद दुबे हाईस्कूल की परीक्षा में फेल होने के बाद पिता की डांट की डर से 42 वर्ष पहले घर छोड़कर चले गए थे। उस समय उनकी उम्र 15 वर्ष थी। घरवालों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। बताते हैं कि पुत्र के गम में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को उनके राजस्थान में होने की जानकारी मिली। बताया जाता है कि मुरलीधर दुबे कुछ दिन पहले राजस्थान के कोटा में बीमार हालत में सड़क पर लावारिस पाए गए थे। लावारिस लोगों की सेवा करने वाली संस्था ‘अपना घर आश्रम’ एअरोड्रम चौराहा कोटा राजस्थान के सरंक्षण में रह रहे थे। इनके भाई शेषधर दुबे को सूचना देकर पुलिस ने परिजनों को कोटा भेजा। वहां से कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद घरवाले उन्हें लेकर औराई रवाना हो गए। इधर घरवाले 42 साल बाद लापता मुरलीधर के घर पहुंचने की बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन


खुशी से चमक उठीं बूढ़ी मां की आंखें
औराई। 42 वर्ष से बेटे के इंतजार में बैठी मां बसंती देवी के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। कहा कि 1975/76 की बात है, जब वह हाईस्कूल में फेल हो गया था और डांट के बाद घर छोड़कर चला गया। कुछ दिनों के बाद आया था, लेकिन फिर चला गया और फिर नहीं लौटा। मुरलीधर तीन भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। बड़े भाई शरदकांत पशुपालन विभाग में कर्मचारी हैं। उनके बाद निशिकांत बाहर रहते हैं। मुरलीधर का घर का नाम तुषारकांत है। इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद से रिटायर होने के कुछ वर्ष बाद गोलोकवासी हो गए। भरी आंखों से उन्होंने कहा कि अगर घर पर रहा होता तो आज उसका भी परिवार होता।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed