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दो दशक से सरकारी भवन को तरस रहा अल्पसंख्यक विभाग

Wed, 30 Jan 2019 12:35 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:35 AM IST
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दो दशक से सरकारी भवन को तरस रहा अल्पसंख्यक विभाग

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ज्ञानपुर। जनपद सृजन के दो दशक बाद भी वक्फ बोर्ड एवं अल्पसंख्यकों के विकास का जिम्मा संभालने वाले कार्यालय को सरकारी भवन नसीब नहीं हो पाया है। कार्यालयी फिलहाल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके मकान में चल रहा है।

अवगत हो कि जिला बनने के बाद से यह कार्यालय वक्फ बोर्ड तथा अल्पसंख्यक समाज को सुदृढ़ बनाने का जिम्मा संभालता है। इसके लिए 1322 रुपये प्रति माह की दर से मकान का किराया अदा किया जा रहा है। अधिकारी, लिपिक को मिलाकर कुल नौ कर्मचारी छोटे-छोटे तीन कमरों में कार्यों को अमलीजामा पहना रहे हैं। इनमें से विभागीय अधिकारी दो दिन जनपद में तो अन्य दिन मिर्जापुर में बैठकर कार्यभार देखते हैं। यही स्थिति वरिष्ठ लिपिक का स्थानांतरण जौनपुर होने के बाद भी कार्यालय का प्रभार वर्तमान समय में उनके पास ही है। अन्य कर्मचारी जनपद में संचालित मदरसों, छात्रवृत्ति, मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं, निरीक्षण आदि कार्यों को निबटाने में लगे रहते हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बिनोद कुमार जायसवाल का कहना है कि कई बार शासन-प्रशासन स्तर पर लिखापढ़ी कर सरकारी भवन की मांग की जा चुकी है। विकास भवन, पुरानी तहसील में खाली भवनों को लेकर जिले के उच्चाधिकारियों ने पहल भी की, लेकिन वह कार्यालय के हिसाब से खरा नहीं उतर सके। पर्याप्त जगह वाला भवन मिलने पर ही कार्यालय अन्यत्र शिफ्ट हो पाएगा।
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