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दुरस्थ शिक्षा मे उम्र व स्थान का बंधन नहीं
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ज्ञानपुर। केएनपीजी कॉलेज में बृहस्पतिवार को प्रयागराज राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम परिचय की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विश्वविद्यालय की संचालित पाठ्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुक्त विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रभारी प्रो. आरपीएस यादव ने कहा कि कोई भी, कहीं भी और कभी भी की परिकल्पना पर पूरे वर्ष पर्यंत प्रवेश देने के लिए राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय कृत संकल्पित है। इसमें छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण और रोजगार परक शिक्षा देने की पूूूरी व्यवस्था होती है। जहां एक हजार से ज्यादा अध्यन केंद्रों पर सौ से ज्यदा पाठ्यक्रमों का संचालन हो रहा है। इस दौरान विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव डॉ. राजेश पांडेय ने कहा कि दूरस्थ प्रणाली के माध्यम से उच्च शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना कार्यशाला मुख्य उदेश्य है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने कहा दुरस्थ शिक्षा प्रणाली के जरिए गृहणी से लेकर नौकरी पेशा वालों के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। गोरखपुर सहजनवा के पूर्व प्राचार्य डॉ. शिव नरेश मिश्र ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय में अध्यन के लिए उम्र और स्थान का कोई बंधन नहीं होता है। इस मौके पर डॉ. श्रीप्रकाश मिश्रा, डॉ. नवीन कुमार और मुक्त विश्वविद्यालय समेत महाविद्यालय के तमाम शिक्षक मौजूद रहे।
मुक्त विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रभारी प्रो. आरपीएस यादव ने कहा कि कोई भी, कहीं भी और कभी भी की परिकल्पना पर पूरे वर्ष पर्यंत प्रवेश देने के लिए राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय कृत संकल्पित है। इसमें छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण और रोजगार परक शिक्षा देने की पूूूरी व्यवस्था होती है। जहां एक हजार से ज्यादा अध्यन केंद्रों पर सौ से ज्यदा पाठ्यक्रमों का संचालन हो रहा है। इस दौरान विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव डॉ. राजेश पांडेय ने कहा कि दूरस्थ प्रणाली के माध्यम से उच्च शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना कार्यशाला मुख्य उदेश्य है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने कहा दुरस्थ शिक्षा प्रणाली के जरिए गृहणी से लेकर नौकरी पेशा वालों के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। गोरखपुर सहजनवा के पूर्व प्राचार्य डॉ. शिव नरेश मिश्र ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय में अध्यन के लिए उम्र और स्थान का कोई बंधन नहीं होता है। इस मौके पर डॉ. श्रीप्रकाश मिश्रा, डॉ. नवीन कुमार और मुक्त विश्वविद्यालय समेत महाविद्यालय के तमाम शिक्षक मौजूद रहे।
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