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प्रबोधिनी एकादशी: श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई पुण्य की डुबकी
Updated Mon, 19 Nov 2018 11:31 PM IST
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ज्ञानपुर/गोपीगंज। हरि प्रबोधिनी एकादशी पर सोमवार को जिले के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। साथ ही किसानों ने गन्ने की नई फसल का पूजन कर उसका दान किया। इस दौरान सुख-सौभाग्य की कामना की गई। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं ने दोपहर बाद विधि- विधान से तुलसी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह कराया।
हरि प्रबोधिनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु इसी दिन योग निद्रा से जागृत हुए थे। रामपुर और सीतामढ़ी गंगा घाटों के अलावा आसपास के तमाम घाटों पर हरि प्रवोधिनी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। देवोत्थानएकादशी के दिन का विशेष महत्व है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो एकादशी की तिथि रविवार को दिन में ही लग गई थी, लेकिन उदया तिथि के चलते सोमवार को स्नान पर्व मनाया गया। इसके लिए सुबह से ही महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा घाटों पर जमा होने लगी थी जो बढ़ती गई। बिहरोजपुर, जहांगीराबाद, शीतला घाट डेरवां, चतुर्भुज घाट, भवानीपुर कुटेश्वर नाथ, बरजी आदि घाटों पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। स्नान-ध्यान, पूजन कर दान किया गया। एकादशी का व्रत धारण कर भगवान विष्णु की आराधना की गई। घरों में तुलसी पूजन विधिविधान पूर्वक करने के बाद तुलसी विवाह की परंपरा निभाई गई। दीपावली पर दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी गणेश का पूजन न करने पाने वाले लोगों ने एकादशी के दिन दीपावली मनाई और दुकान, प्रतिष्ठान, घरों को सजाकर पूजन करने के बादप्रसाद का वितरण किया। ज्ञानपुर नगर के हरिहरनाथ धाम समेत तमाम धार्मिक स्थलों पर एकादशी पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
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हरि प्रबोधिनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु इसी दिन योग निद्रा से जागृत हुए थे। रामपुर और सीतामढ़ी गंगा घाटों के अलावा आसपास के तमाम घाटों पर हरि प्रवोधिनी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। देवोत्थानएकादशी के दिन का विशेष महत्व है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो एकादशी की तिथि रविवार को दिन में ही लग गई थी, लेकिन उदया तिथि के चलते सोमवार को स्नान पर्व मनाया गया। इसके लिए सुबह से ही महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा घाटों पर जमा होने लगी थी जो बढ़ती गई। बिहरोजपुर, जहांगीराबाद, शीतला घाट डेरवां, चतुर्भुज घाट, भवानीपुर कुटेश्वर नाथ, बरजी आदि घाटों पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। स्नान-ध्यान, पूजन कर दान किया गया। एकादशी का व्रत धारण कर भगवान विष्णु की आराधना की गई। घरों में तुलसी पूजन विधिविधान पूर्वक करने के बाद तुलसी विवाह की परंपरा निभाई गई। दीपावली पर दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी गणेश का पूजन न करने पाने वाले लोगों ने एकादशी के दिन दीपावली मनाई और दुकान, प्रतिष्ठान, घरों को सजाकर पूजन करने के बादप्रसाद का वितरण किया। ज्ञानपुर नगर के हरिहरनाथ धाम समेत तमाम धार्मिक स्थलों पर एकादशी पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
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