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सतह पर आई माननीयों की हताशा
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:40 AM IST
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ज्ञानपुर। उत्तर प्रदेश दिवस समारोह के मंच पर बुधवार को भदोही और औराई के विधायकों की हताशा छलक कर सामने आ गई। मंच से जनता की समस्याओं की चर्चा करते हुए भाजपा के दोनों विधायकों के दिल की पीड़ा के साथ अफसरों और माननीयों के बीच की खटास भी सतह पर आ गई। अपनी ही सरकार में पुलिस और प्रशासन के कार्यालयों में भ्रष्टाचार और खुद की उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाते हुए दोनों विधायकों ने कहा कि प्रशासनिक अमले में हमारी एक नहीं सुनी जा रही है। यूपी दिवस समारोह में जिले के दो विधायकों की हताशा और लाचारी सामने आ गई। भदोही विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने एक-एक कर बिजली, जिलापूर्ति कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों में व्याप्त अनियमितताओं को मंच से उठाया। कहा कि कोटे की दुकानें निरस्त और निलंबित तो खूब की जा रहीं हैं, लेकिन गरीबों को राशन समुचित ढंग से नहीं मिल रहा है। गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं सही ढंग से नहीं मिल रहीं हैं, लेकिन कार्यालयों में भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं है। पिछली सरकारों की मानसिकता के प्रभाव में चुन-चुनकर जो गांव लोहिया और अंबेडकर चुने गए थे, उन्हीं का विद्युतीकरण किया जा रहा है। चेतावनी दी कि अगर गरीबों का हक उन्हें नहीं मिला तो इस मसले को जनता की अदालत में ले जाएंगे। इसके बाद मंच पर आए औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर ने पहले तो केंद्र सरकार की उपलब्धियां और योजनाएं गिनाईं, फिर वह भी अफसरों की कार्यप्रणाली पर बरस पड़े। डीएम और एसपी की मौजूदगी में उन्होंने मंच से कहा कि विधायकों के पहुंचने पर अधिकारी सीट छोड़कर नहीं उठते हैं। क्या यही प्रोटोकॉल है। चोरी और आपराधिक घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन वर्कआउट के नाम पर कुछ भी नहीं है। उन्होंने एक जमीन से जुड़े किसी कार्य के लिए अगर राजस्व का अधिकारी निर्देशित करता है कि काम होने दिया जाए तो पुलिस का अधिकारी फोन कर उसी काम को रोकने का निर्देश देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जमीन से जुड़े मसले में पुलिस का अधिकारी कैसे हस्तक्षेप कर सकता है। इसके बाद सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकारियों और विधायकों के बीच अगर कोई समस्या है तो उसे संवाद के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में इस मसले पर बातचीत होगी।
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