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संशोधित कला सीधे समाज से संबंध स्थापित करती हैं
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ज्ञानपुर। औपनिवेशिक मानसिकता से ऊपर उठकर अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पर्यावरण से जुड़कर लोक-ग्रामीण कलाओं से संवाद करते हुए आधुनिक, सामाजिक एवं कलात्मक आंदोलनों से जुड़कर जो कला विकसित होगी, विश्व में उसी की पहचान होगी। ये बातें बुधवार को केएनपीजी कॉलेज में चित्रकला परिषद की ओर से आयोजित रंगोत्सव कार्यक्रम के समापन अवसर पर बुधवार को मुख्य अतिथि डॉ. राजकुमार श्रीवास्तव ने कही। इस मौके पर छात्रों ने कला प्रदर्शनी भी लगाई।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. श्रीवास्तव ने नारियल फोड़कर दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि विडंबना यह है कि शहर वाले गांव की ओर रुख नहीं करते। वे केवल विचार और प्रयोगों से जुड़े होते हैं। उन्हें स्वाभाविकता से जुड़ना चाहिए। कहा कि इस रंगोत्सव में जिंदगी का कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शुभा श्रीवास्तव ने कहा कि कलाकृतियों में यथार्थवादी और अमूर्तवादी शैलियों में अभिव्यक्ति की गई है। ये कलाकृतियां सीधे समाज से संवाद स्थापित करती हैं। रंगोत्सव में 48 कलाकारों की कलाकृतियां विभिन्न माध्यमों से उकेरी गईं। कहीं शिव तोे कहीं स्वच्छता। कहीं धर्म तो कहीं समाज से जुड़े चित्रों को प्रदर्शित किया गया।
इस दौरान सोनम (बेटियां), आंचल (संगीत), गायत्री (भ्रष्टाचार), प्रिया (नटराज), कुसुम (होली), सोनी (प्र कृति), संगीता (शृंगार), पूनम (आस्का), श्रद्धा (राधा कृष्ण), श्रेया मालवीय (गंगा घाट), तान्या (विविध), और अभिषेक (कुंभ) आदि ने अपनी कलाओं से दर्शकों को प्रभावित किया। चित्रकला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोशन प्रसाद ने अतिथियों और छात्रों का आभार व्यक्त किया। वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि छात्रों ने जो नैसर्गिकता और विषयवस्तु प्रस्तुत किया है, वह जनमानस को एक नया संदेश दे रही है। कार्यक्रम में डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, डॉ. संजय कुमार, डॉ. अजय सिंह, डॉ. मनोज, डॉ. इंगलेश भारती, डॉ. ऋचा आदि उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. श्रीवास्तव ने नारियल फोड़कर दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि विडंबना यह है कि शहर वाले गांव की ओर रुख नहीं करते। वे केवल विचार और प्रयोगों से जुड़े होते हैं। उन्हें स्वाभाविकता से जुड़ना चाहिए। कहा कि इस रंगोत्सव में जिंदगी का कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शुभा श्रीवास्तव ने कहा कि कलाकृतियों में यथार्थवादी और अमूर्तवादी शैलियों में अभिव्यक्ति की गई है। ये कलाकृतियां सीधे समाज से संवाद स्थापित करती हैं। रंगोत्सव में 48 कलाकारों की कलाकृतियां विभिन्न माध्यमों से उकेरी गईं। कहीं शिव तोे कहीं स्वच्छता। कहीं धर्म तो कहीं समाज से जुड़े चित्रों को प्रदर्शित किया गया।
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इस दौरान सोनम (बेटियां), आंचल (संगीत), गायत्री (भ्रष्टाचार), प्रिया (नटराज), कुसुम (होली), सोनी (प्र कृति), संगीता (शृंगार), पूनम (आस्का), श्रद्धा (राधा कृष्ण), श्रेया मालवीय (गंगा घाट), तान्या (विविध), और अभिषेक (कुंभ) आदि ने अपनी कलाओं से दर्शकों को प्रभावित किया। चित्रकला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोशन प्रसाद ने अतिथियों और छात्रों का आभार व्यक्त किया। वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि छात्रों ने जो नैसर्गिकता और विषयवस्तु प्रस्तुत किया है, वह जनमानस को एक नया संदेश दे रही है। कार्यक्रम में डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, डॉ. संजय कुमार, डॉ. अजय सिंह, डॉ. मनोज, डॉ. इंगलेश भारती, डॉ. ऋचा आदि उपस्थित रहे।
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