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पैकेज-कीचड़युक्त मार्गों पर आवागमन रहा दूभर
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वहिदानगर। बुधवार अलसुबह मौसम का मिजाज बिगड़ने के बाद हुई झमाझम बारिश से राजमार्ग को जोड़ने वाले कई ग्रामीण क्षेत्र के मार्गों पर कीचड़ हो गया। इससे लोगों का आवागमन दूभर हो गया।
सबसे नारकीय स्थिति सूफीनगर-जंगीगंज रेलवे स्टेशन मार्ग पर देखने को मिली। ऐसी ही दुर्दुशा नगरीय क्षेत्रों में बने लिंक मार्ग की भी रही। ऊंज मार्ग, नवधन मार्ग, गोधना, दौरियाहीं, दरवांसी-रजमला, रामकिशुनपुर-बसहीं दलित बस्ती मार्ग पर बुधवार को बारिश और घरों से निकलने वाले गंदे पानी ने पूरे दिन तक लोगों को हलाकान किया। कीचड़ में फंसकर बाइक और साइकल सवार गिरते नजर आए।
चारे और ईंधन बचाने का होता रहा प्रयास
ऊंज। बेमौसम शुरू हुई बारिश ने ग्रामीणों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी। पशुओं को खिलाने के लिए रखे गए पुआल और ूभूसे को तिरपाल, प्लास्टिक और खाना बनाने के लिए ऊपलों को बारिश से बचाने की जुगत होती रही। बताया कि पुआल भीग गया तो पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में होने से लोग अब भी आधुनिक उपकरणों की अपेक्षा ऊपलों को वरीयता देते आ रहे हैं, जिसको बारिश से बचाने के लिए लोग जुटे रहे।
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दलहनी-तिलहनी फसलें बनी रहीं चिंता का सबब
सीतामढ़ी। बुधवार सुबह से शाम तक मौसम के करवट लेते रहने से दलहनी और तिलहनी फसलों को लेकर किसानों के माथे की सिकन रही। किसानों का कहना है कि फूल लेती सरसों की फसल, मटर, चना आदि बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ जाएगी। बारिश के बीच ही किसानों ने खेतों की ओर रुखकर पानी को इधर-उधर हटाते-बढ़ाते रहे। वहीं गेहूं के लिए बारिश वरदान मानी जा रही है। उधर आलू की खेती भी चौपट होने की संभावना जताई जाती रही। जिला मुख्यालय से सटे चकवा, लखनो, भुड़की आदि क्षेत्रों के किसानों का कहना रहा कि अगेती आलू फसल बारिश के पानी के साथ-साथ झुलसा रोग एवं ओले पड़ने से कहीं की नहीं रह जाएंगी।
सबसे नारकीय स्थिति सूफीनगर-जंगीगंज रेलवे स्टेशन मार्ग पर देखने को मिली। ऐसी ही दुर्दुशा नगरीय क्षेत्रों में बने लिंक मार्ग की भी रही। ऊंज मार्ग, नवधन मार्ग, गोधना, दौरियाहीं, दरवांसी-रजमला, रामकिशुनपुर-बसहीं दलित बस्ती मार्ग पर बुधवार को बारिश और घरों से निकलने वाले गंदे पानी ने पूरे दिन तक लोगों को हलाकान किया। कीचड़ में फंसकर बाइक और साइकल सवार गिरते नजर आए।
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चारे और ईंधन बचाने का होता रहा प्रयास
ऊंज। बेमौसम शुरू हुई बारिश ने ग्रामीणों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी। पशुओं को खिलाने के लिए रखे गए पुआल और ूभूसे को तिरपाल, प्लास्टिक और खाना बनाने के लिए ऊपलों को बारिश से बचाने की जुगत होती रही। बताया कि पुआल भीग गया तो पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में होने से लोग अब भी आधुनिक उपकरणों की अपेक्षा ऊपलों को वरीयता देते आ रहे हैं, जिसको बारिश से बचाने के लिए लोग जुटे रहे।
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दलहनी-तिलहनी फसलें बनी रहीं चिंता का सबब
सीतामढ़ी। बुधवार सुबह से शाम तक मौसम के करवट लेते रहने से दलहनी और तिलहनी फसलों को लेकर किसानों के माथे की सिकन रही। किसानों का कहना है कि फूल लेती सरसों की फसल, मटर, चना आदि बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ जाएगी। बारिश के बीच ही किसानों ने खेतों की ओर रुखकर पानी को इधर-उधर हटाते-बढ़ाते रहे। वहीं गेहूं के लिए बारिश वरदान मानी जा रही है। उधर आलू की खेती भी चौपट होने की संभावना जताई जाती रही। जिला मुख्यालय से सटे चकवा, लखनो, भुड़की आदि क्षेत्रों के किसानों का कहना रहा कि अगेती आलू फसल बारिश के पानी के साथ-साथ झुलसा रोग एवं ओले पड़ने से कहीं की नहीं रह जाएंगी।