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नवमी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:46 AM IST
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अखिल भारतीय राष्ट्रीय रामायण लवकुश जन्मोत्सव नवमी मेला
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सीतामढ़ी (भदोही)। धार्मिक स्थली सीतामढ़ी का ऐतिहासिक अखिल भारतीय राष्ट्रीय रामायण लवकुश जन्मोत्सव नवमी मेला रविवार को संपन्न हो गया। मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार सुबह रिमझिम फुहारों के बीच शुरू हुए धार्मिक मेले में लवकुश कुमारों के जयकारे लगते रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पतित पावनी गंगा में स्नान कर दानपुण्य किया तथा विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन कर मेले का लुत्फ उठाया। मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक दर्शन पूजन का सिलसिला चलता रहा।
सुबह रिमझिम फुहारों ने मौसम को खुशगवार बना दिया। हालांकि बारिश के कारण दोपहर 12 बजे तक भीड़ कम रही। इसके बाद, मेलार्थियों और श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ने लगा और 2 बजे तक धार्मिक स्थल लोगों से खचाखच भर गया। मेलार्थियों ने महर्षि वाल्मीकि आश्रम मंदिर, श्री सीता समाहित स्थल मंदिर, बड़े हनुमान जी, उड़िया बाबा आश्रम, सीताधाम मंदिर, बाबा धवासा नाथ आश्रम आदि स्थलों के मंदिरों में दर्शन पूजन कर मेले का भरपूर आनंद उठाया। मेले में रंग-बिरंगी दूकानें, झूले, जादूगर, मौत का कुआं, चिड़ियाघर, बच्चों के तरह-तरह के मनोरंजन के झूले, एयर झूले के साथ स्वादिष्ट चाट, फुलकी, जलेबी, मिठाई की दूकानों पर लोग जमकर खरीदारी की। चाट फुलकी की दूकानों पर महिलाओं की अधिक भीड़ रही। शाम को सीतामढ़ी गेट से लेकर मठहा चौराहे तक जाम की स्थिति रही। मेलार्थियों ने मेले का जमकर आनंद उठाया।
केश वाटिका की महिलाओं ने की पूजा
सीतामढ़ी। लवकुश कुमारों के जन्मोत्सव पर महिला श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए और सीता केश वाटिका का शृंगारकर पूजन अर्चन कर अमर सुहाग की कामना की। मान्यता है कि लवकुश जन्मोत्सव के दिन सीताकेश वाटिका का शृंगार कर पूजन करने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मेले में इंद्रदेव ने अपनी उपस्थिति सुबह ही दर्ज कराकर उमस भरे मौसम को खुशगवार बना दिया।
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सुबह रिमझिम फुहारों ने मौसम को खुशगवार बना दिया। हालांकि बारिश के कारण दोपहर 12 बजे तक भीड़ कम रही। इसके बाद, मेलार्थियों और श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ने लगा और 2 बजे तक धार्मिक स्थल लोगों से खचाखच भर गया। मेलार्थियों ने महर्षि वाल्मीकि आश्रम मंदिर, श्री सीता समाहित स्थल मंदिर, बड़े हनुमान जी, उड़िया बाबा आश्रम, सीताधाम मंदिर, बाबा धवासा नाथ आश्रम आदि स्थलों के मंदिरों में दर्शन पूजन कर मेले का भरपूर आनंद उठाया। मेले में रंग-बिरंगी दूकानें, झूले, जादूगर, मौत का कुआं, चिड़ियाघर, बच्चों के तरह-तरह के मनोरंजन के झूले, एयर झूले के साथ स्वादिष्ट चाट, फुलकी, जलेबी, मिठाई की दूकानों पर लोग जमकर खरीदारी की। चाट फुलकी की दूकानों पर महिलाओं की अधिक भीड़ रही। शाम को सीतामढ़ी गेट से लेकर मठहा चौराहे तक जाम की स्थिति रही। मेलार्थियों ने मेले का जमकर आनंद उठाया।
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केश वाटिका की महिलाओं ने की पूजा
सीतामढ़ी। लवकुश कुमारों के जन्मोत्सव पर महिला श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए और सीता केश वाटिका का शृंगारकर पूजन अर्चन कर अमर सुहाग की कामना की। मान्यता है कि लवकुश जन्मोत्सव के दिन सीताकेश वाटिका का शृंगार कर पूजन करने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मेले में इंद्रदेव ने अपनी उपस्थिति सुबह ही दर्ज कराकर उमस भरे मौसम को खुशगवार बना दिया।
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