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Bhadohi News: जून में औसत से 103 मिमी कम बारिश
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ज्ञानपुर। मानसून की सुस्ती का असर इस वर्ष जून में साफ दिखाई दिया। जून माह में औसत वर्षा 108 मिलीमीटर होती है, लेकिन इस बार पूरे महीने में केवल 5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही जून में सबसे कम बारिश का आठ साल का रिकॉर्ड टूट गया। मानसून में देरी के कारण एक ओर उमस और गर्मी से लोग परेशान रहे, वहीं दूसरी ओर किसानों की खेती भी प्रभावित हुई। 15 से 20 जून के बीच मानसून आने पर किसान धान की रोपाई शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार मानसून में देरी होने से यह कार्य काफी हद तक प्रभावित हुआ। इससे पहले वर्ष 2019 में जून माह में केवल 22 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी।
आमतौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में 21 जून तक मानसून पहुंच जाता है। हर वर्ष यह करीब 15 से 20 जून के बीच आ जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। जून के दौरान मौसम में छिटपुट बदलाव तो देखने को मिले, लेकिन बारिश नाममात्र की हुई। पूरे महीने तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में जून में 22 मिमी, वर्ष 2023 में 56 मिमी, वर्ष 2024 में 58 मिमी और वर्ष 2025 में 70 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए अच्छा संकेत नहीं है। मानसून समय से नहीं आने के कारण धान की रोपाई में देरी होना तय है। जिले में 37,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई होती है। यहां दो से ढाई लाख लघु एवं सीमांत किसान हैं, जिनमें करीब दो लाख किसान धान और गेहूं की खेती करते हैं। किसान मल्लूराम बिंद और सुभाष दुबे ने बताया कि समय पर मानसून की एंट्री नहीं हुई है, जिससे धान की रोपाई में देरी होगी।
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आमतौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में 21 जून तक मानसून पहुंच जाता है। हर वर्ष यह करीब 15 से 20 जून के बीच आ जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। जून के दौरान मौसम में छिटपुट बदलाव तो देखने को मिले, लेकिन बारिश नाममात्र की हुई। पूरे महीने तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में जून में 22 मिमी, वर्ष 2023 में 56 मिमी, वर्ष 2024 में 58 मिमी और वर्ष 2025 में 70 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए अच्छा संकेत नहीं है। मानसून समय से नहीं आने के कारण धान की रोपाई में देरी होना तय है। जिले में 37,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई होती है। यहां दो से ढाई लाख लघु एवं सीमांत किसान हैं, जिनमें करीब दो लाख किसान धान और गेहूं की खेती करते हैं। किसान मल्लूराम बिंद और सुभाष दुबे ने बताया कि समय पर मानसून की एंट्री नहीं हुई है, जिससे धान की रोपाई में देरी होगी।
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