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हाथ की रेखाएं घिस गई तो नजर से मिलेगा राशन
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ज्ञानपुर। अगर राशन कार्ड की सूची में नाम होने के बावजूद फिंगर प्रिंट मैच न होने से जिनको राशन नहीं मिल रहा है, वे अब अपनी नजरें दिखाकर राशन ले सकेंगे। जिले की कई कोटे की दुकानों पर आइरिस स्कैनर की सुविधा शुरू कर दी गई है। इससे अब ई-पॉश मशीन में फिंगर प्रिंट नहीं होने के बाद भी कार्डधारकों को राशन से वंचित नहीं होना पड़ेगा।
राशन वितरण में धांधली को देखते हुए शासन की ओर से सरकारी गल्ले की दुकानों पर ई-पॉश मशीन के जरिए राशन वितरण शुरू कराया गया। लेकिन, ई-पॉश मशीन में फिंगर प्रिंट की समस्या आने से हर महीने बड़ी संख्या में कार्डधारकों को राशन से वंचित होना पड़ रहा था। इसकी आपूर्ति विभाग में हर रोज दर्जनभर से ज्यादा शिकायतें आती थीं। इसे देखते हुए ई-पॉश मशीन में आइरिस डिवाइस लगाई गई है, जिससे जिन कार्डधारकों की रेखाएं घिसने के कारण उनका फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो रहा हो, वह मशीन के जरिए अपनी आंखों को स्कैन कराकर राशन ले सकते हैं। डीएसओ अमित कुमार तिवारी ने बताया कहा कि किसान और ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाज करने वाली महिलाओं के हाथ की रेखाओं के साथ अंगुलियों और अंगूठे की रेखाएं भी घिस जाती हैं। ई-पॉश मशीन पर ऐसे लोगों की बायोमीट्रिक पहचान नहीं हो पाने से उन्हें राशन से वंचित होना पड़ रहा था। इसे देखते हुए आइरिस स्कैनर लगाया गया है। जिससे लाभार्थी अपनी नजरों का स्कैन कराकर राशन ले सकेंगे।
बेहतर होगा नेटवर्क
आपूर्ति निरीक्षक दिनेश कुमार यादव ने बताया कि ई-पॉस मशीनों में भी आइरिस स्कैनर अटैच करने की सुविधा होगी। इसके लिए हर जिले में एजेंसी की एक टीम जाएगी। कोटेदारों को इसे चलाने की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है। इसके अलावा एजेंसी के टेक्निकल एक्सपर्ट मोबाइल फुटवर्क सर्वे भी करेंगे ताकि इसका पता लगाया जा सके कि किस इलाके में किस मोबाइल ऑपरेटर का नेटवर्क बेहतर है। जहां जिस ऑपरेटर का मोबाइल नेटवर्क बेहतर मिलेगा, वहां उसी कंपनी का सिम ई-पॉस में लगाया जाएगा।
राशन वितरण में धांधली को देखते हुए शासन की ओर से सरकारी गल्ले की दुकानों पर ई-पॉश मशीन के जरिए राशन वितरण शुरू कराया गया। लेकिन, ई-पॉश मशीन में फिंगर प्रिंट की समस्या आने से हर महीने बड़ी संख्या में कार्डधारकों को राशन से वंचित होना पड़ रहा था। इसकी आपूर्ति विभाग में हर रोज दर्जनभर से ज्यादा शिकायतें आती थीं। इसे देखते हुए ई-पॉश मशीन में आइरिस डिवाइस लगाई गई है, जिससे जिन कार्डधारकों की रेखाएं घिसने के कारण उनका फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो रहा हो, वह मशीन के जरिए अपनी आंखों को स्कैन कराकर राशन ले सकते हैं। डीएसओ अमित कुमार तिवारी ने बताया कहा कि किसान और ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाज करने वाली महिलाओं के हाथ की रेखाओं के साथ अंगुलियों और अंगूठे की रेखाएं भी घिस जाती हैं। ई-पॉश मशीन पर ऐसे लोगों की बायोमीट्रिक पहचान नहीं हो पाने से उन्हें राशन से वंचित होना पड़ रहा था। इसे देखते हुए आइरिस स्कैनर लगाया गया है। जिससे लाभार्थी अपनी नजरों का स्कैन कराकर राशन ले सकेंगे।
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बेहतर होगा नेटवर्क
आपूर्ति निरीक्षक दिनेश कुमार यादव ने बताया कि ई-पॉस मशीनों में भी आइरिस स्कैनर अटैच करने की सुविधा होगी। इसके लिए हर जिले में एजेंसी की एक टीम जाएगी। कोटेदारों को इसे चलाने की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है। इसके अलावा एजेंसी के टेक्निकल एक्सपर्ट मोबाइल फुटवर्क सर्वे भी करेंगे ताकि इसका पता लगाया जा सके कि किस इलाके में किस मोबाइल ऑपरेटर का नेटवर्क बेहतर है। जहां जिस ऑपरेटर का मोबाइल नेटवर्क बेहतर मिलेगा, वहां उसी कंपनी का सिम ई-पॉस में लगाया जाएगा।
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