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56 लाख में भी नहीं मार पाए मच्छर
Updated Fri, 26 Oct 2018 12:47 AM IST
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ज्ञानपुर। तेजी से पांव पसार रही जानलेवा बीमारी डेंगू से हाय-तौबा मची हुई है तो सरकारी विभाग राहत और बचाव के लिए शासन से मिली रकम को डकारने में लगे हैं। मच्छररोधी दवा के छिड़काव के लिए जिले की 561 ग्राम पंचायतों के प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में भेजी गई 56 लाख से अधिक की धनराशि का वारा-न्यारा कर दिया गया। उसका कोई हिसाब नहीं है। जबकि दवा छिड़काव के नाम पर एक भी गांव में कुछ नहीं किया गया। इस सीजन में जिले में 17 मरीजों में डेंगू के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें तो इनमें से सात लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई और सीएचसी के एक चिकित्सक समेत दो लोगों की जान चली गई। हालांकि डेंगू से मौत का गैरसरकारी आंकड़ा और भी ज्यादा है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की तंद्रा टूटी तो आनन-फानन में प्रभावित स्थानों पर दवा छिड़काव कर लार्वा टेस्ट आदि कर फर्ज की इतिश्री कर ली गई। गांवों में वह भी नहीं हुआ। जबकि प्रत्येक गांव के लिए प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में 10 हजार रुपये का बजट दिया जाता है। जिले में 561 ग्राम पंचायतें हैं। इस लिहाज से कुल 56 लाख 10 हजार रुपये दवा छिड़काव के लिए दिए गए, लेकिन उसका कोई हिसाब नहीं है। खास बात यह है कि छिड़काव के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला पंचायत राज विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दो विभागों की खींचतान में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। सीएमओ डॉ. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि यह जिम्मेदारी प्रधानों की है। प्रधान और एएनएम के खाते में धनराशि भेजी जाती है, लेकिन एएनएम का कहना है कि ग्राम प्रधान का सपोर्ट नहीं मिलता। जबकि जिला पंचायत राज अधिकारी बालेश धर द्विवेदी ने कहा कि एएनएम का पूरा सहयोग नहीं मिलता। अगर प्रधानों के पक्ष से परेशानी हो रही थी तो स्वास्थ्य विभाग को हमें अवगत कराना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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